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Sree Panchang

Important Updates

Sree Panchang: Being Hindu, We require to know some timings at least:

 

प्रात:काल: प्रतिदिन सूर्योदय से 48 मिनट पूर्व

अरुणोदय काल: सूर्योदय से एक घंटा 12 मिनट पूर्व |

उषा काल: सूर्योदय से 2 घंटे पहले |

अभिजीत काल: दोपहर 11:36 बजे से 12:24 बजे तक, बुधवार वर्जित है |

प्रदोष काल: प्रतिदिन सूर्यास्त के 48 मिनट बाद तक |

गोधूलि बेला: प्रतिदिन सूर्यास्त के 25 मिनट पहले तथा 25 मिनट बाद तक |

राहुकाल- प्रतिदिन डेढ़ घंटा-डेढ़ घंटा का | रविवार को प्रातः 4:30 से 6:00 सोमवार को प्रातः 7:30 से 9:00 बजे तक मंगलवार को 3:00 बजे से 4:30 बजे तक बुधवार को 12:00 बजे से 1:30 बजे तक गुरुवार को 1:30 बजे से 3:00 बजे तक शुक्रवार को 10:30 से 12:00 तक तथा शनिवार को 9:00 से 10:30 तक रहता है

Timings of Rahu-kaal by (Sree Panchang)

रविवारप्रातः 4:30प्रातः 6:00
सोमवारप्रातः 7:30प्रातः 9:00
मंगलवारअपराह्न 3:00 बजे से अपराह्न 4:30 बजे
बुधवारदोपहर 12:00 बजेदोपहर 1:30 बजे
गुरुवारदोपहर 1:30 बजेदोपहर 3:00 बजे
शुक्रवारप्रातः 10:30प्रातः 12:00
शनिवारप्रातः 9:00प्रातः 10:30
These Timings of Rahu-Kaal is fixed and unchangable

शुभ चौघड़िया मुहूर्त को ऐसे पहचानें

चौघड़िया मुहूर्त का नीचे दिया गया वक़्त सदैव एक सामान रहता है और श्रेष्ठ चौघड़िया-अमृत, चर, लाभ, शुभ है |
शीघ्रता में कोई भी यात्रा-मुहूर्त ना बनता हो या एकाएक यात्रा करने का मौका आ पड़े तो उस अवसर के लिए विशेष रूप से चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग है |

Sree Panchang
Sree Panchang

आपकी दिनचर्या कैसी हो (what should be the routine)

हमारी दिनचर्या कैसी हो? यह स्वयं हम पर निर्भर करता है, Sree Panchang जरुर आपसे निवेदन करेगा कि हमे रोज़ प्रातः काल सूर्योदय के पहले 5:00 बजे नींद से उठ जाना चाहिए और सुबह-सुबह नहाधोकर साफ सुथरे वस्त्र पहनकर एक तांबे के लोटे में स्वच्छ जल लेकर उसमें थोडा गंगा जल, रोली, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर प्रातः सूर्योदय के समय उगते सूर्य को जरुर अर्घ्य देना चाहिए और अर्घ्य के दौरान हमें निम्नलिखित श्लोको का जप करते रहना चाहिए :

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।’ (11 बार)

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय।
मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा: ।। (3 बार)

अर्ध्य देते समय इस बात का ख्याल अवश्य रखे कि अर्ध्य दिया हुआ जल छीटों के रूप में हमारे पैरों पर न गिरे, यह हमारे स्वास्थ्य के साथ ही हमारे धन-सम्पदा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है | उसके बाद ही हमे अपने इष्ट देव की पूजा करनी चाहिए और खासकर हमें हमारी नित्य पूजा में अपने पितरों के लिए निम्नलिखित मंत्रो के जप को अवश्य शामिल कर लेना चाहिए और भगवान की आरती हमें घी के दीपक जलाकर करनी है : 

ओम देवताभ्य: पितृृृृृृृृभ्यश्च महयोगिभ्य एव च |

नम: स्वाहायै  स्वधायै नित्यमेव नमो नमः ||

इन मंत्रों का 108 जप रोजाना आपको आपके पितृ-दोष से मुक्त करेगा और आपके मार्ग में आई तमाम बाधाओं को दूर करेगा क्योंकि पितरों का आशीर्वाद पाना आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है | यह अवश्य याद रखे कि प्रत्येक मंगलवार सुन्दरकाण्ड का पाठ तथा प्रत्येक शनिवार हनुमान चालीसा और बजरंग-बाण का पाठ अवश्य करें | पूजा  के पश्चात, घर के बड़े बुजुर्गों का पैर छूकर उनसे आशीर्वाद अवश्य लें और उसके पश्चात परिवार के सदस्यों को  ₹10- 20-50-100 जो भी देना चाहें वह रोज़मर्रा के खर्च के हिसाब से दें |

यह एक शगुन माना जाता है जो आपके उत्थान के  लिए बेहद जरूरी है | Sree Panchang आपसे निवेदन करता है कि ईश्वर के प्रति अपने आदर्शों को दिखाते हुए आप इसी नियम का पालन रोज करें | आप स्वयं देखेंगे कि आपकी तरक्की 10 गुना बढ़ जाएगी | आपके मार्ग की हर बाधाएं कट जाएगी और बेहतर होगा यदि आप रोजाना अपनी ऑफिसियल ड्रेस का कलर भी ग्रह के पसंदीदा कलर के हिसाब से पहने | इनके अलावा  दो बातें हैं जिसका मे उल्लेख करना चाहूँगा :

  1. कुछ व्यक्ति अपनी दैनिक जीवन में झूठ बहुत बोलते हैं, यह झूठ हम नहीं भी बोले तो चलेगा परन्तु यदि यह इन्सान के स्वभाव में घुस जाए तो यह समस्या बन जाती है अतः मेरा आप सबसे निवेदन है कि कृपा करके व्यर्थ में झूठ बोलना बंद करेें, जिसकी  वजह से बेवजह आपके कर्मफल नष्ट न हो और जाने-अनजाने हमे कभी भी किसी भी  पाप का सामना करना न पड़े |
  2. एक और बड़ी बात जो मैैं आपसे कहना चाहता हूँ वह है रोजाना हम जो गालियाँ वेबजह देतें है, क्या हम उन्हें रोक नहीं सकते क्योंकि यह एक बहुत बड़ा पाप है जो हमारे अच्छे कार्यो को पाप में बदल देगा अतः अपनी दिनचर्या में यदि हम स्वयं को सुधर न सके तो फिर सूर्य को अर्ध्य देने का क्या मतलब या भगवान की उपासना का भी क्या अर्थ या हर किये गए पुण्य और अच्छे कार्य का भी कोई अर्थ नहीं क्योंकि यदि हमारी कमाई हुई दौलत का व्यर्थ में नाश हो जाए तो फिर क्या मतलब हमारे अच्छे कार्यो का, अतः हमे गालियों पर पूर्ण विराम लगाना है ताकि हमारी कमाई हुई दौलत व्यर्थ ही बर्बाद न हो |
Year 2020
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