Please Subscribe us
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Sree Panchang

श्राद्ध एक धार्मिक अनुष्ठान है जो दिवंगत आत्मा की शांति के लिए, मृत पूर्वजों के बच्चों या रिश्तेदारों द्वारा संपन्न किया जाता है क्योंकि हमारे पूर्वज, हमारे बहुत ही निकट और प्रिय थे और हमारा जीवन उनके बलिदान की नींव पर टिका हुआ है|
पितृपक्ष, साल का एक विशेष समय है जब हिंदू स्वयं, कुछ अनुष्ठान करके और कुछ कार्यों को करने से खुद को मना करके, अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि भाद्रपद माष के दौरान 16 दिनों तक, पूर्णिमा से अमावस्या तक, हमारे मृत पूर्वजों की आत्माएं, ऊर्जा के रूप में पृथ्वी पर आती हैं और ये ऊर्जाएं, हमे और हमारे जीवन को उनकी इच्छा के अनुसार प्रभावित कर सकती हैं।
इस अवधि के दौरान, हमे ब्राह्मण अथवा पुजारियों को भोजन, कपड़े और दान देना चाहिए जिन्होंने श्राद्ध अनुष्ठान करने में हमारी मदद की। इस विशेस वक़्त पर हमे गाय, कुत्ते और कौवे जैसे जीव को खिलाना चाहिए।
पितृपक्ष हमारे मृत पूर्वजों के लिए एक खास अनुष्ठान है| विभिन्न अच्छे कर्मों के माध्यम से, हमे उन्हें खुश करना और ईश्वर से उनकी मुक्ति और मोक्ष के लिए तन, मन, धन से श्राद्ध करना, एक अतिआवश्यक कदम है इसलिए इसका पालन करना नितांत आवश्यक है|
पितृपक्ष के दौरान, हमे कुछ खाद्य पदार्थ खाने से विशेष परहेज़ करना चाहिए जैसे चावल, मांस, लहसुन, प्याज, मसूर, काली उड़द, चना दाल, काला जीरा, काला नमक, काली सरसों इत्यादि और सब्जी में, हमे बैगन बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए|हमे घर का बना सात्विक भोजन करना चाहिए और बाहर का खाना खाने से परहेज करना चाहिए|भोजन में कुछ भी अशुद्ध या किसी भी प्रकार की अशुद्धता का प्रयोग न हो और खासकर श्राद्ध के भोजन में बासी खाद्य पदार्थ पर हमे खास ध्यान देना चाहिए|
श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को अपने नाखून नहीं काटने चाहिए। उसे दाढ़ी या बाल नहीं कटवाना चाहिए। उन्हें गंदे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, उन्हें श्राद्ध कर्म करते समय चमड़े से बने उत्पादों जैसे बेल्ट, बटुआ या जूते का उपयोग नहीं करना चाहिए,
यदि आप श्राद्ध अनुष्ठान कर रहे हैं और मंत्रों का जाप कर रहे हैं तो किसी से बात करने के लिए, इसे कभी भी रोकें नहीं, इससे नकारात्मक ऊर्जा आ सकती है और श्राद्ध के दौरान, आपके अच्छे कर्मों और दान को नष्ट कर सकता है| कई बार लोग तंबाकू, सिगरेट या शराब का सेवन करते हैं, ऐसे बुरे व्यवहार में शामिल न हों। यह श्राद्ध कर्म करने के फलदायी परिणाम में बाधा डालता है| शारीरिक संबंध बनाने से बचें, ब्रह्मचर्य में रहें, झूठ न बोलें या कठोर शब्दों का प्रयोग न करें और दूसरों को श्राप देने से बचे|
यदि संभव हो तो पूरे 16 दिनों तक घर में चप्पल न पहनें| श्राद्ध की पूजा और अनुष्ठान के लिए काले या लाल फूलों और अत्यंत सुगंधित या गंधहीन फूलों का उपयोग न करे|
बार-बार भोजन करना, श्राद्ध के दिन, श्राद्ध अनुष्ठान करने वाले व्यक्ति द्वारा निषिद्ध है|
अनुष्ठान के लिए लोहे के बर्तनों का उपयोग न करें, इसके बजाय सोने, चांदी, तांबे और पीतल के पात्र का उपयोग करें|
बैठने के लिए, रेशमी, ऊन अथवा लकड़ी आदि के आसनों का प्रयोग न करें| श्राद्ध काल में न तो नए कपड़े खरीदें और न ही पहनें, नए घर में प्रवेश न करें, कोई नया व्यवसाय या नया उद्यम शुरू न करें या इस पखवाड़े के दौरान जन्मदिन आदि न मनाएं।
इस दौरान घर में नई भौतिक चीजें जैसे नई कार आदि न खरीदें। श्राद्ध कर्म सायंकाल, भोर या सायंकाल में नहीं करना चाहिए, श्राद्ध के दिन वस्त्र नहीं धोना चाहिए, पितृपक्ष के दौरान भगवान और अपने पूर्वजों से अपने पिछले कर्मों को शुद्ध करने और आपके
जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए ईमानदारी से प्रार्थना करें।
श्राद्ध के दौरान, इन कुछ सरल नियमो का प्रयोग कर, आप अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने में सहायक हो सकते हैं और आप अपने जीवन में सुख की अनुभूति कर सकते हैं|

श्राद्ध की मुख्य तिथियां (Shraddh dates-2021)

20 सितंबर, 2021- पहला श्राद्ध (पूर्णिमा का श्राद्ध)
21 सितंबर, 2021- प्रतिपदा का श्राद्ध
22 सितंबर, 2021- द्वितीया का श्राद्ध
23 सितंबर, 2021- तृतीया का श्राद्ध
24 सितंबर, 2021- चतुर्थी का श्राद्ध
25 सितंबर, 2021 – पंचमी का श्राद्ध
26 सितंबर, 2021 – षष्ठी का श्राद्ध
27 सितंबर, 2021 – सप्तमी का श्राद्ध
28 सितंबर, 2021- अष्टमी का श्राद्ध
29 सितंबर, 2021- नवमी का श्राद्ध
30 सितंबर, 2021- दशमी का श्राद्ध
01 अक्टूबर, 2021- एकादशी का श्राद्ध
02 अक्टूबर, 2021-द्वादशी का श्राद्ध
03 अक्टूबर, 2021- त्रयोदशी का श्राद्ध
04 अक्टूबर, 2021- चतुर्दशी का श्राद्ध
05 अक्टूबर, 2021- सर्वपितृ श्राद्ध