शनिदेव – Learn how to protect yourself in 3 ways

शनिदेव

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शनिदेव की चाल

शनिदेव: शनि उदय होने के पश्चात अब वक्री होने वाले हैं| शनि की उल्टी चाल का मतलब हैं कि शनिदेव शुभ फल प्रदान नहीं करते हैं| शनि की दृष्टि और शनि की चाल के अनुसार फरवरी का महीना महत्वपूर्ण है. शनि 7 जनवरी 2021 को अस्त हुए थे और 9 फरवरी से शनिदेव जी उदय हो चुके हैं, लेकिन अब वह वक्री होने जा रहे हैं|

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शनिदेव

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है| शनि का इस वर्ष 2021 में कोई राशि परिवर्तन नहीं है| शनि इस वर्ष सिर्फ नक्षत्र परिर्वतन करेंगे| शनिदेव जी ने 22 जनवरी को इस वर्ष प्रथम नक्षत्र परिवर्तन किया था| शनि इस समय श्रवण नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं और 23 मई को वे वक्री होने जा रहे हैं|

शनिदेव वर्ष 2021 में मकर राशि में ही गोचर करेंगे और ख़ास बात ये है कि शनि मकर राशि में वक्री और मार्गी भी रहेंगे| शनिवार 11 अक्टूबर , 2021 को शनि मार्गी हो जायेंगे | साधारणतः शनि वक्री होने पर उन राशियों की मुश्किलों को बढ़ा देते हैं जिन पर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या चल रही है| जिन लोगों पर शनि की महादशा है उन्हें खासकर सावधान रहने की जरूरत है|

वक्री होने पर शनि पीड़ित हो जाते हैं जिसकी वजह से अशुभ फलों में वृद्धि होना तय माना गया है | मिथुन व तुला राशि के ऊपर शनि की ढैय्या चल रही है जबकि धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है| ऐसे में खासकर इन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए |

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शनि राशि परिवर्तन के समय चंद्रमा जन्मराशि से
गोचर फल व पाद फल निम्नलिखित चार्ट में राशि के समक्ष अंकित है |

शनिदेव का आगमन

मेष-सिंह-धनु राशिवालों के लिए शनिदेव का लोहपाद से आगमन कष्टकारी एवं श्रम संघर्ष युक्त है, हर कार्य में बाधा रहेगी |
वृष-कन्या-कुंभ राशिवालों के लिए ताम्रपाद से शनिदेव का आगमन सुख समृद्धि दायक होगा |
मिथुन-वृश्चिक-मकर राशिवालों के लिए शनिदेव देव का स्वर्णपाद से आगमन संघर्ष के साथ फलदायक होगा |
कर्क-तुला-मीन राशिवालों के लिए रजतपाद से शनिदेव का आगमन सुख- सौभाग्य की वृद्धि करने वाला, साथ ही आर्थिक लाभ एवं उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा |

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मेष राशि के लिए– दशम शनि शुभ है किंतु लौहपाद अशुभ है |
विशेष परिश्रम, साहस और पुरुषार्थ से परिवारिक जीवन का निर्वाह, जीविको- पार्जन अध्ययन, व्यवसाय एवं धन लाभ में साधारण सफलता मिलेगी | नौकरी वालों को पदोन्नति एवं स्थानांतरण का योग रहेगा | माता-पिता सुखों की कमी का अनुभव करेंगे | विद्या, शिक्षा के क्षेत्र में सफलता भी मिलेगी | राजनीतिक क्षेत्र में सफलताएं तथा बेरोजगार व्यक्तियों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगें |

वृष राशि के लिए– नवम शनि पूज्य है | ताम्रपाद शुभ है | डूबते को तिनके का सहारा मिलेगा | नाना प्रकार की कठिनाइयां और प्रतिबद्धता के रहने पर भी सामाजिक तथा परिवारिक जीवन के निर्वाह में सफल रहेंगे | पारिवारिकजनों में मतभेद लड़ाई-झगड़ों की भी स्थितियां बनेंगी | व्यापारिक असफलताओं का सामना करना पड़ेगा |

मिथुन राशि के लिए– अष्टम शनि अशुभ है | स्वर्णपाद मध्यम है | आक्समिक वाद-विवाद, ऋण एवं दुर्घटनाओं के प्रति सतर्क रहें, अपने इरादों में कामयाब हो सकते हैं | आर्थिक आवागमन, व्यापारिक दिनचर्या तथा नौकरी की गतिविधियां सामान्य रहेगी | भाग्य में उन्नति के शुभ अवसर भी प्राप्त होंगे | आर्थिक लाभ की अच्छी स्थिति बनेगी |

कर्क राशि के लिए– सप्तम शनि पूज्य है | रजतपाद उत्तम है | निश्चित समय पर हर कार्य संपादित करते हुए भी अनेक समस्याओं में रहेंगे, घर गृहस्थी का मध्यम सुख मिलेगा, दांपत्य जीवन कलुषित विचार धाराओं के बीच प्रवाहित होगा | धनाभाव के कारण, महत्वपूर्ण कार्य स्थापित करना होगा | सामान्य जीविका निर्वाह, कर्तव्य पालन में तथा स्त्री बच्चों के स्वास्थ्य में बाधा रहेगी |

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सिंह राशि के लिए– छठा शनि शुभ है | लौहपाद अशुभ है | परिवारिक उत्पीड़न, स्वजनों से असहयोग, कळह और दुश्चिंता होते हुए भी कर्तव्य पालन में तटस्थ रहेंगे | प्रभाव प्रतिष्ठा की रक्षा होगी | आरोग्य व व्यवसाय पक्ष मध्यम रहेगा |सामाजिक मान-सम्मान की प्राप्ति होगी |

कन्या राशि के लिए– पंचम शनि पूज्य है | ताम्रपाद उत्तम है | आर्थिक परिश्रम एवं निजी सूझबूझ से कार्यों में आंशिक सफलता, ॠण चिंता, परिवारिक और व्यवसायिक स्थिति सामान्य रहेगी | इष्ट-देव की आराधना में तत्पर रहें | किसी अनिष्ट की आशा नही है | पिता से विवाद की स्थितियां बनेंगी | स्वास्थ्य संबंधी कष्ट और परेशानियां भी हो सकती है |

तुला राशि के लिए– चतुर्थ शनि अशुभ है | रजतपाद शुभ है | परिवारिक समस्याओं से वंचित रहेंगे | आर्थिक लेन-देन में कटु अनुभव होगा | वाद-विवाद एवं न्यायालयीय परेशानियों में अधिक समय व्यतीत होगा | उन्नति के क्षेत्र में अग्रसर होंगे | हर क्षेत्र में लाभ की स्थितियां बनेंगी | धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी|

वृश्चिक राशि के लिए– तृृृृतीय शनि उत्तम है | स्वर्ण पाद मध्यम है | साहस, पराक्रम, पुरुषार्थ की वृद्धि, भाग्य, कर्म, प्रारब्ध का सहयोग मिलेगा | नौकरी व्यवसाय की आर्थिक स्थिति सुदृृढ़ रहेगी | परिवारिक सदस्यों में कुछ मतभेद की स्थिति बन सकती है | श्र्मानुकूल धन का लाभ भी हो सकता है |

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धनु राशि के लिए– द्वितीय शनि पूज्य है | स्वर्णपाद माध्यम है | संकल्पित कार्यों में अवरोध, विरोध, निकट संबंधियों से मनमुटाव, पत्नी के परामर्श से रक्षा होगी आर्थिक व्यवसायीक स्थिति चिंंतनीय होगी | दांपत्य जीवन को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा, जातक को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा | हृदय पर बीच की ढैय्या जातक को कष्ट प्रदान कर सकता है |

मकर राशि के लिए– जन्मस्थ शनि पूज्य है | स्वर्ण पाद माध्यम है | संकल्पित कार्यों में अवरोध-विरोध, निकट संबंधियों से मनमुटाव, बाहरी सहयोग की प्राप्ति एवं देव-कृपा से धन-धर्म, मान-सम्मान की रक्षा होगी | मंगल की दृष्टि पड़ने से वाहन से कष्ट होगा | अनावश्यक जोखिम न उठाएं | आर्थिक स्थिति कमजोर रहेगी |

कुंभ राशि के लिए– लाभस्थ शनि शुभ है | रजत पाद से शनि का आगमन श्रेष्ठ प्रभावी रहेगा | सामाजिक जीवन में सफलता, मान, यश, प्रतिष्ठा की वृद्धि होगी |आर्थिक लाभ के अवसर प्राप्त होंगे | धार्मिक कार्यों में रुचि, शैक्षिक व बौद्धिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेगेें | अधिक दौड़-धूप तथा पारिवारिक संघर्ष की वृद्धि होगी |

मीन राशि के लिए– एकादश शनि और रजतपाद दोनों उत्तम है | भाग्योदय-कर्मोदय, चल-अचल संपत्ति का विकास, पदोन्नति, धन संचय, आवश्यक यात्राएं घर-गृहस्थी, समाज-परिवार में अधिकांश अनुकूलता मिलेंगी | प्रयत्न, परिश्रम से हर क्षेत्र में प्रतिष्ठा, प्रभाव कायम कर सकते हैं |

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शनि की साढेसाती तथा ढैय्या संवत् 2077

इस बार वर्ष पर्यंत शनिदेव मकर राशि पर रहेंगे अतः धनु, मकर तथा कुंभ राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती रहेगी | मिथुन और तुला राशि वालों के लिए शनि की ढैय्या रहेगी | धनु राशि वालों के लिए पैर पर, मकर राशि वालों के लिए ह्रदय पर तथा कुंभ राशि वालों के लिए सिर पर, शनि की साढ़ेसाती रहेगी |

जिन राशिवालों के ऊपर शनि की ढैय्या व साढ़ेसाती चल रही हो उन्हें सुंदरकांड, रामायण या हनुमान चालीसा का नित्य पाठ तथा शनि का व्रत करना चाहिए और शनि व्रत कथा का श्रवण करना चाहिए| यह शान्ति के लिए अतिअवाश्यक है | विशेषकर शनिवार को प्रात: काल पीपल वृक्ष में जल दान तथा सायं काल दीप दान जरुर करें| काले घोड़े की नाल की अंगूठी शनिवार को मध्यम अंगुली में धारण करना चाहिए | शनिवार का व्रत तथा शनि का दान  करना चाहिए |

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शनि चालीसा

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