सत्यनारायण व्रत-कथा- Avail best dates

सत्यनारायण व्रत-कथा

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पुर्णिमा का महत्व

पुर्णिमा के दिन खासकर सत्यनारायण व्रत-कथा का विधान है, इस विशेष दिन आप पूर्णिमा के शुभ मुहुर्त में, आप श्री सत्यनारायण भगवान जी की पूजा कर सकते हैं, यदि आप किसी नए घर में प्रवेश करते हैं या किसी नये व्यवसाय को प्रारंभ करते हैं या किसी विवाह इत्यादि कार्यक्रम का आयोजन करते हैं तो यह आपके लिए अति उत्तम होगा कि आप सत्यनारायण व्रत-कथा का अनुष्ठान अवश्य करें और उनका आशीर्वाद सबसे पहले प्राप्त करें ताकि आपका कार्य अच्छी तरह सिद्ध हो, यह प्रक्रिया हमारे पूर्वजों से चला आ रहा है|

devotees worshipping Lord Satyanarayana
सत्यनारायण व्रत-कथा

ओम जय जगदीश हरे- आरती से श्री नारायण स्वामी को प्रसन्न करें

श्री सत्यनारायण भगवान जी की पूजा स्वयं करें

बहुत से लोग हर पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण व्रत-कथा का आयोजन करते हैं, ऐसा आप स्वयं भी कर सकते हैं, इसमें यह कोई जरूरी नहीं कि पंडित के द्वारा ही यह पूजा की जाए, यह अत्यंत सरल प्रक्रिया है, इसमें शालिग्राम की एक छोटी सी पत्थर की पूजा होती है जो कि आपके पास होनी चाहिए और बाद बाकी सारे विधि-विधान आपको हमारे लेख में मिल जाएंगे उसके अनुसार आप सत्यनारायण व्रत-कथा स्वंय कर सकते हैं|

पूजा की आवश्यक सामग्री

सत्यनारायण व्रत-कथा के लिए सबसे पहले, घर के द्वार पर आम पल्लव जरूर लगाएं और एक चौकी ले, जिसे अच्छी तरह साफ करके एक लाल कपड़ा बिछा दें और चौकी के चारों ओर केले का खंबा लगाकर एक मंडप बना ले, फूल-माला इत्यादि से मंडप को सुशोभित कर दें और चौकी के ऊपर एक सिंघासन रख लें, जिसपर आप श्री शालिग्राम जी को स्थापित करें | एक मिटटी के कलश के ऊपर, स्वास्तिक बनाकर, मोली बांधकर सराई में चावल रखकर एक छोटा सा नारियल उसके ऊपर रखे दें और उसे भगवान के सामने स्थापित करें |

पूजा के शुरुआत में ही भगवान के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती अवश्य जलाएं, कपूर और घी का दीपक तैयार करके  एक थाली में आरती के लिए पहले ही रख लें, भगवान के भोग के लिए गेहूं के आटे का चूर्ण, नारियल, मखाना, चिरंजीव और चीनी इत्यादि डालकर भुनकर बना लें, बताशा उसमें डाल दें और बाज़ार से खरीद कर भोग के लिए कुछ मिठाइयां अवस्य रक्खे, प्रसाद के लिए पांच फल रक्खे, सत्यनारायण भगवान की कथा के लिए एक किताब अवश्य रक्खे|

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श्री सत्यनारायण भगवान जी की पूजा प्रारम्भ

सब तैयार करने के पश्चात आप भगवान के सामने एक आसन बिछाकर बैठ जाएं और परिवार के सभी सदस्यगण जमीन पर एक चादर बिछाकर श्रद्धापूर्वक बैठ जाएँ, शुरुवात में सबके माथे पर तिलक अवश्य लगाएं तथा मौली सबके हाथो में बाँध दे, पूजा करते  समय भगवान का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए और आपका मुख उत्तर या पूरब की तरफ हो, पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद, चीनी आदि का बंदोबस्त करके पंचामृत बना ले |

अब मन्त्रों का उच्चारण करते हुए, भगवान शालिग्राम की पत्थर की मूर्ति को हाथ में लेकर पानी से स्नान करते हुए पंचामृत से भी स्नान कराएँ उसके बाद फिर पानी से वापस भगवान को स्नान कराएँ और अच्छी तरह भगवान को नये गमछे से पोंंछ लें और अब भगवान को सिंघासन पर विराजमान करें और जनेऊँ पहनाएं तथा रोली व चन्दन का तिलक लगाकर फूल माला पहनाएं |

अब भगवान को भोग लगाएं, याद रक्खें कि इन सारी प्रक्रियाओं के दौरान कथा की किताब में जो मन्त्रं दिए हुए है, उन्हें अवश्य पढते रहें क्योंकि भगवान के हर कार्यों के दौरान मंत्रो का उच्चारण आवश्यक है, अब दीपक, अगरबत्ती जलाने और भोग लगाने के पश्चात, अब आप सपरिवार कथा आरम्भ करें और परिवार के सभी सदस्यगण कथा को ध्यानपूर्वक सुने, कथा संपूर्ण होने पर सत्यनारायण व्रत-कथा कपूर और घी से करें और साथ ही गणेश जी और हनुमान जी की आरती भी अवश्य करें :

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सत्यनारायण भगवान की आरती सुने

आरती-वंदन :

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

रतन जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे
नारद करत निरंतर, घंटा ध्वनि बाजे, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

प्रगट भए कलिकारण, द्विज को दरश दियो
बूढो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

दुर्बल भील कराल, जिन पर कृपा करी
चंद्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपति हरी, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दिन्ही
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्ही, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो
श्रद्धा धारण किन्ही तिनको काज सरयो, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

ग्वाल-बाल संग राजा, वन में भक्ति करी
मन वांछित फल दीन्हो, दीन दयाल हरी, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

चढ़त प्रसाद सवाया, कदली फल-मेवा
धूप दीप तुलसी से, राजी सत्य देवा, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावे
कहतशिवानंद स्वामी, मन वांछित फल पावे, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

आरति कीजै हनुमान लला की सुने

 Satya Narayan Puja fast date 2021

प्रारंभ दिन माह की  पूर्णिमा पूर्णिमा तिथी समाप्त 
28 जनवरीगुरुवारपौष पूर्णिमा01.17 – 00.4529 जनवरी
27 फरवरीशनिवारमाघ पूर्णिमा15.49 – 13:4628 फरवरी
28 मार्चरविवारफाल्गुन पूर्णिमा03:27 – 00:1729 मार्च
26 अप्रैलमंगलवारचैत्र पूर्णिमा12:44 – 09:0127 अप्रैल
25 मईबुधवारवैशाख पूर्णिमा20:29 – 16:4326 मई
24 जूनगुरुवारज्येष्ठ पूर्णिमा03:32 – 00:0925 जून
23 जुलाईशनिवारआषाढ़ पूर्णिमा10:43 – 08:0624 जुलाई
21 अगस्तरविवारश्रावण पूर्णिमा19:00 – 17:3122 अगस्त
20 सितम्बरसोमवारभाद्रपद पूर्णिमा05:28 – 05:2421 सितम्बर
19 अक्टूबरबुधवारआश्विन पूर्णिमा19:03 – 20:2620 अक्टूबर
18 नवम्बरशुक्रवारकार्तिक पूर्णिमा12:00 – 14:2619 नवम्बर
18 दिसम्बररविवारमार्गशीर्ष पूर्णिमा07:24 – 10:0519 दिसम्बर
गणपति बप्पा की आरती लिरिक्स के साथ गाएं
सत्यनारायण व्रत-कथा

नैमिषारण्य – वेदों, पुराणों, सत्यनारायण कथा एवं ८८,००० ऋषियों की तपोभूमि