Kalabhairvashtakam Stotram

Kalabhairvashtakam Stotram-कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं

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Kalabhairvashtakam Stotram-कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं

कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं का नियमित पाठ हमे हमारे बुरे ग्रहों से सुरक्षा प्रदान करता है, काशी में जहाँ विश्वनाथ बाबा का दरबार, ठीक वहीँ काशी के कोतवाल श्री भैरव जी का भी अंदाज़ निराला है|

काशी अपनी परंपराओं और मान्यताओं के द्वारा प्रचलित है, यहां धर्म परंपरा है, संस्कृति है, श्रद्धा-भक्ति और गंगा-मैया का किनारा, लोगो का मन मोह लेता है, पंडितों द्वारा हर जगह पूजा-पाठ और ईश्वर की आराधना में अपने दिन को व्यतीत करता हर काशीवासियों की यही दिनचर्या रही है|

आगे हम निश्चित रूप से भगवान श्री काल भैरव की चर्चा करेंगे और जानेंगे की हमें हमारे बुरे दिनों में कौन सहारा देता है, संभवतः ग्रहों के प्रताप से इंसान कभी बच नहीं सकता, यह सर्व्बिदित है, परन्तु काशी नगरी में हमारे काल भैरव जी के शरण में आया हुआ हर व्यक्ति खुद को महफूज़ समझता है अतः आप भी श्री कालभैरव जी कि भक्ति का लाभ उठायें और ईश्वर की सुरक्षा में खुद को पाकर एक आनंदायक जीवन को महसूस करें |

Kalabhairvashtakam Stotram-कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं

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भगवान श्री कालभैरव के बारे में जाने :

Kalabhairvashtakam Stotram-कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं का नियमित पाठ करने से किसी भी व्यक्ति को बड़ा आनंद महसूस होगा और उनके बल- पराक्रम में भी अवश्य वृद्धि होगी और ऐसी मान्यता है कि काल भैरव जी की उपासना से इंसान के सभी कष्ट दूर होते हैं और सबसे बड़ी बात- शनि साढ़ेसाती हो या राहू-केतु का दुष्प्रभाव, यहाँ भक्तो को सुरक्षा मिलती है|

यदि किसी का कोर्ट-कचहरी का मुकदमा हो या किसी पर तंत्र मंत्र का साया, काल-भैरव आराधना से शत्रु पर विजय प्राप्त की जा सकती है और साथ ही व्यक्ति में पराक्रम और वैभव का संचार होता है, इस बार काल भैरवाष्टमी शनिवार 7, दिसंबर, 2020 को पड़ रही है, कालाष्टमी को काल-भैरव जयंती के रूप में जाना जाता है इस दिन भगवान शिव, भैरव जी के रूप में प्रकट हुए थे और भक्तगण, इस दिन पूजा करने के साथ ही उनके लिए उपवास रखते हैं, शिव भक्तों के लिए यह अत्यंत खास दिन है, काल-भैरव जी की खुशी के लिए काले कुत्ते को भोजन या मिठाई खिलाना अत्यंत शुभदायी है, इससे जातक के ऊपर विपद कम होती है |

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कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं

ऐसे करें कालभैरव जी की  उपासना :

प्राचीन कथाओं के अनुसार, काल-भैरव का उपवास करने वाले जातक को सुबह नहा धोकर, पितरों को श्राद्ध और तर्पण देने के बाद, सारा दिन भगवान श्री काल भैरव जी के पूजा-अर्चना करनी चाहिए और रात्रि के समय धूप, दीप, काला उड़द दाल, काला तिल, सरसों का तेल का दिया बनाकर, भगवान श्री काल भैरव जी के मंदिर में जाकर थोडा वक्त व्यतीत करते हुए भगवन की आरती के साथ, नीचे दिए गए स्तोत्रंं का पाठ अवश्य करें|

आरती के बाद भगवान की फेरी अवश्य लगाएं, सबसे बड़ी बात यह अवश्य ध्यान रखें कि भगवान श्री काल भैरव जी का वाहन कुत्ता है इसलिए जब जातक अपना व्रत खोलें तो वह अपने हाथोंं से कुत्ते की मन-पसंद मिठाई बाज़ार से खरीदकर, किसी काले या अन्य कुत्ते को अवश्य खिलाये जिससे उनपर सालोसाल भगवान की कृपा बरसती रहें और जो इंसान कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं का नियमित पाठ करता है उसे भय से तो मुक्ति मिलती ही है और साथ ही उनपर ग्रहों का दुष्प्रभाव काफी कम हो जाता है |

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