74th Independence day of India

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74th Independence day of India : इस साल 15 अगस्त, 2020 को हम सब आज़ादी का 74वाँ वर्षगाँठ मानाने जा रहे हैं | करोना वायरस के कहर के बीच, इस बार 15 अगस्त का कार्यक्रम, हर साल की अपेक्षा थोड़ा सादगी भरा हो सकता है हालाँकि लाल किले पर अभी भी तैयारियां हो रही है और सिर्फ 2 ही दिन बचे हुए हैं |

Independence day of India

74th Independence day of India
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जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी, इस बार लाल किले पर झंडा फहराने के लिए करीब 7:21 पर लाल किले के ग्राउंड पर आएंगे| उनका कार्यक्रम करीब 1:30 घंटा चलेगा | इसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना के जवान गार्ड ऑफ ऑनर देंगे | जिसमें करीब 22 जवान और अफसर होंगे, वहीं राष्ट्रीय सेल्यूट में 32 जवान और अफसर होंगे, साथ ही दिल्ली पुलिस के जवान भी शामिल रहेंगे |

74th Independence day of India

करोना की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए यह कार्यक्रम पूरा किया जाएगा | इस बार नीचे फॉरग्राउंड पर स्कूली बच्चें नहीं होंगे क्योंकि करोना से बचाव के लिए उन्हें शामिल नहीं किया गया है | परन्तु एनसीसी के 500 बच्चें इसमें शामिल होंगे हालाँकि उनके बीच में थोड़ी दूरियां होंगी | प्रधानमंत्री के नजदीक फोटो लेने वाले फोटोग्राफरों का भी करोना टेस्ट किया जायेगा | मीडिया की संख्या और मौकों से कम होगी |

15 अगस्त, 1947 का दिन, हम सब देशवासियों के लिए पुनर्जनम का दिन था, जिस दिन हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने आज़ादी के बाद पहली बार लाल-किले से तिरंगा फहराया था | सुभाष चन्द्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे कितने लोगो ने क्रांति की आग फैलाई और भी कई अनगिनत नाम है जिन्होंने इस आजादी के युद्ध में संघर्ष किया और बलिदान भी हुए |

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वहीं गांधीजी और नेहरु ने लोगों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया और सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजो को इस देश से जाने के लिए मजबूर कर दिया | हम सबके लिए 15 अगस्त, 1947 का दिन एतिहसिक महत्व रखता है क्योकि साल 1857 में शुरू की गई आज़ादी की लड़ाई साल 1947 में सफलता पूर्वक ख़त्म हुई थी | हालाँकि 13 अप्रैल, 1919 को जालियाँ वाला बाग़ हत्याकांड की वजह से देश में आजादी की लड़ाई का संघर्ष तेज़ हो गया था और उसके साथ ही ब्रिटिश शासकों का जुल्म भी तेज़ हो चला था |

74th Independence day of India
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इधर से भी स्वतंत्रता सैनानियों ने ब्रिटिश हुकूमत पर संघर्ष तेज कर दिया था | जब संघर्ष बहुत बढ़ गया तो 3 जून, 1947 शाम को 7:00 अंतिम वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने दिल्ली में खचाखच भरे पत्रकारों के एक सम्मलेन में देश के विभाजन के तारीख के साथ-साथ 15 अगस्त, 1947 का दिन मुक़र्रर किया | भारत को आजादी देने के लिए 15 अगस्त के बाद की तारीख पर सहमती बनी थी |

लेकिन अंग्रेजों ने हिन्दू-मुस्लिम के बीच दंगे करवाने की अपनी चाल को सफल बनाने के लिए, इसे बदलकर भारत को पहले ही आजाद कर दिया। और हुआ वही जैसा की अंग्रेजो ने चाहा था | वे अपनी गन्दी राजनीती करने में कामयाब हुए और उनके देश छोड़ने के बाद ही देश का विभाजन हुआ और यह देश दो मुल्कों में बट गया, लाखों बेपनाह जाने हमेशा के लिए ख़त्म हुए, जमकर हत्या, बलात्कार और लूट-पाट हुए |

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ब्रिटिश शासक उसके करीब 200 साल पहले, हमारे देश में व्यापार करने आये थे, पर धीरे-धीरे उन्होंने हमारे इस देश पर कब्जा कर लिया, उसकी मुख्य वज़ह हम यह कह सकतें हैं कि हमारे देश के राजाओं और महाराजाओं ने मिलकर, उनके लिए सत्ता तक पहुँचने के रास्तेें आसान किये, वर्ना कोई बाहरी व्यक्ति कैसे इस तरह किसी मुल्क पर अपने राज्य कायम कर सकता था |

सत्ता में पहुँच बना लेने के बाद, इनके अत्याचार धीरे-धीरे बढ़ने लगे, गरीबो पर लगान के नाम पर बड़े रूप में कर वसूला जाने लगा | नफरत की राजनीती बढ़ने लगी, जात-पात के नाम पर देश के हिंदू और मुसळमानों के बीच में दीवार बनानी चाही हालाँकि उसमे वे सफल भी हुए |

Jai Hind
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