सत्यनारायण कथा-2020

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सत्यनारायण कथा-आरती
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सत्यनारायण कथा

satyanaaraayan katha

पुर्णिमा का महत्व :

पुर्णिमा के दिन खासकर सत्यनारायण कथा का विधान है, इस विशेष दिन आप पूर्णिमा के शुभ मुहुर्त में, आप श्री सत्यनारायण भगवान जी की पूजा कर सकते हैं, यदि आप किसी नए घर में प्रवेश करते हैं या किसी नये व्यवसाय को प्रारंभ करते हैं या किसी विवाह इत्यादि कार्यक्रम का आयोजन करते हैं तो यह आपके लिए अति उत्तम होगा कि आप सत्यनारायण कथा का अनुष्ठान अवश्य करें और उनका आशीर्वाद सबसे पहले प्राप्त करें ताकि आपका कार्य अच्छी तरह सिद्ध हो, यह प्रक्रिया हमारे पूर्वजों से चला आ रहा है|

श्री सत्यनारायण भगवान जी की पूजा स्वयं करें :

बहुत से लोग हर पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा का आयोजन करते हैं, ऐसा आप स्वयं भी कर सकते हैं, इसमें यह कोई जरूरी नहीं कि पंडित के द्वारा ही यह पूजा की जाए, यह अत्यंत सरल प्रक्रिया है, इसमें शालिग्राम की एक छोटी सी पत्थर की पूजा होती है जो कि आपके पास होनी चाहिए और बाद बाकी सारे विधि-विधान आपको हमारे लेख में मिल जाएंगे उसके अनुसार आप सत्यनारायण कथा स्वंय कर सकते हैं|

सत्यनारायण कथा

पूजा की आवश्यक सामग्री (Essential Materials of Pooja) :

सत्यनारायण कथा के लिए व्रत अत्यंत आवश्यक है, सबसे पहले, घर के द्वार पर आम पल्लव जरूर लगाएं और एक चौकी ले, जिसे अच्छी तरह साफ करके एक लाल कपड़ा बिछा दें और चौकी के चारों ओर केले का खंबा लगाकर एक मंडप बना ले, फूल-माला इत्यादि से मंडप को सुशोभित कर दें और चौकी के ऊपर एक सिंघासन रख लें, जिसपर आप श्री शालिग्राम जी को स्थापित करें | एक मिटटी के कलश के ऊपर, स्वास्तिक बनाकर, मोली बांधकर सराई में चावल रखकर एक छोटा सा नारियल उसके ऊपर रखे दें और उसे भगवान के सामने स्थापित करें |

पूजा के शुरुआत में ही भगवान के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती अवश्य जलाएं, कपूर और घी का दीपक तैयार करके  एक थाली में आरती के लिए पहले ही रख लें, भगवान के भोग के लिए गेहूं के आटे का चूर्ण, नारियल, मखाना, चिरंजीव और चीनी इत्यादि डालकर भुनकर बना लें, बताशा उसमें डाल दें और बाज़ार से खरीद कर भोग के लिए कुछ मिठाइयां अवस्य रक्खे, प्रसाद के लिए पांच फल रक्खे, सत्यनारायण भगवान की कथा के लिए एक किताब अवश्य रक्खे|

श्री सत्यनारायण भगवान जी की पूजा प्रारम्भ :

सब तैयार करने के पश्चात आप भगवान के सामने एक आसन बिछाकर बैठ जाएं और परिवार के सभी सदस्यगण जमीन पर एक चादर बिछाकर श्रद्धापूर्वक बैठ जाएँ, शुरुवात में सबके माथे पर तिलक अवश्य लगाएं तथा मौली सबके हाथो में बाँध दे, पूजा करते  समय भगवान का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए और आपका मुख उत्तर या पूरब की तरफ हो, पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद, चीनी आदि का बंदोबस्त करके पंचामृत बना ले |

अब मन्त्रों का उच्चारण करते हुए, भगवान शालिग्राम की पत्थर की मूर्ति को हाथ में लेकर पानी से स्नान करते हुए पंचामृत से भी स्नान कराएँ उसके बाद फिर पानी से वापस भगवान को स्नान कराएँ और अच्छी तरह भगवान को नये गमछे से पोंंछ लें और अब भगवान को सिंघासन पर विराजमान करें और जनेऊँ पहनाएं तथा रोली व चन्दन का तिलक लगाकर फूल माला पहनाएं |

अब भगवान को भोग लगाएं, याद रक्खें कि इन सारी प्रक्रियाओं के दौरान कथा की किताब में जो मन्त्रं दिए हुए है, उन्हें अवश्य पढते रहें क्योंकि भगवान के हर कार्यों के दौरान मंत्रो का उच्चारण आवश्यक है, अब दीपक, अगरबत्ती जलाने और भोग लगाने के पश्चात, अब आप सपरिवार कथा आरम्भ करें और परिवार के सभी सदस्यगण कथा को ध्यानपूर्वक सुने, कथा संपूर्ण होने पर सत्यनारायण कथा कपूर और घी से करें और साथ ही गणेश जी और हनुमान जी की आरती भी अवश्य करें :

आरती-वंदन :

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

रतन जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे
नारद करत निरंतर, घंटा ध्वनि बाजे, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

प्रगट भए कलिकारण, द्विज को दरश दियो
बूढो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

दुर्बल भील कराल, जिन पर कृपा करी
चंद्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपति हरी, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दिन्ही
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्ही, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो
श्रद्धा धारण किन्ही तिनको काज सरयो, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

ग्वाल-बाल संग राजा, वन में भक्ति करी
मन वांछित फल दीन्हो, दीन दयाल हरी, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

चढ़त प्रसाद सवाया, कदली फल-मेवा
धूप दीप तुलसी से, राजी सत्य देवा, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावे
कहतशिवानंद स्वामी, मन वांछित फल पावे, ॐ जय लक्ष्मी रमणा…

 Satya Narayan Puja fast date 2020
10 जनवरीशुक्रवारपौष पूर्णिमा
9 फरवरीरविवारमाघ पूर्णिमा
9 मार्चसोमवारफाल्गुन पूर्णिमा
7 अप्रैलमंगलवारचैत्र पूर्णिमा
7 मईबुधवारवैशाख पूर्णिमा
5 जूनशुक्रवारज्येष्ठ पूर्णिमा
4 जुलाईशनिवारआषाढ़ पूर्णिमा
3 अगस्तसोमवारश्रावण पूर्णिमा
1 सितंबरमंगलवारभाद्रपद पूर्णिमा
1 अक्टूबरबुधवारआश्विन पूर्णिमा
31 अक्टूबरशनिवारआश्विन पूर्णिमा
29 नवंबररविवारकार्तिक पूर्णिमा
29 दिसंबरमंगलवारमार्गशीर्ष पूर्णिमा
सत्यनारायण व्रत तिथि 2020
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