संवत्सर परिचय – sanvatsar parichay

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
72 / 100

विक्रम संवत 2077 में संवत्सर परिचय :

संवत्सर परिचय – sanvatsar parichay : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नव संवत्सर का प्रवेश आरंभ होता है | बुधवार 25 मार्च 2020 से विक्रम संवत 2077 आरंभ हो रहा है | इस विक्रमीय संवत्सर का नाम “प्रमादी” है यह साठ संवत्सरों में रुद्र वीसी के 28वें महायुग का 47वां “प्रमादी” नामक संवत्सर है | 14 मनुमय सृष्टि के 1955885121 कल्पारंभ से कलयुग के 5121 वर्ष व्यतीत होकर 426879 वर्ष भोग्य कलीकाल शेष रहेगा | सातवें मनु (वैवस्वत) के वर्तमान समय में वीरभुुज नृपति शालीवाहन के 1942 शाखा में निम्न 10 अधिकारी आकाशीय मंडल ब्रह्मांड पर राज्य करेंगे |
१) राजा-बुध २) मंत्री-सोम 3) सस्येश गुरु ४) रसेश-शनि 5) नीरसेश-गुरु ६) मेघेश-चंद्र 7) धान्येेश-बुध ८) दुर्गेश-चंद्र ९) धनेश-गुरु १०) फळेश-सूर्य

संवत्सर परिचय - sanvatsar parichay
संवत्सर परिचय

संवत्सर परिचय – sanvatsar parichay

प्रमादी संवत्सर का फल:
प्रमादी संवत्सर में सभी अन्नो के उत्पादन तथा रस पदार्थों की महंगी, सुभिक्ष तथा सौख्य रहेगा | प्रमादि 47वें संवत्सर का स्वामी बुध है चैत्र में अन्न का मूल्य सम, वैशाख, ज्येष्ठ में अन्न संग्रह करने योग्य होगा, आषाढ़ में अल्प वृष्टि, श्रावण के मध्य में मेघ बृष्टि, अन्नो की महंगी, अन्न व्यापार से तिगुना लाभ, भाद्रपद में अतिवृष्टि, अन्न सस्, अश्विनादि छह महीनों में सुमिक्ष, सभी रस पदार्थ महंगे तथा लोग सुखी रहेंगे |

राजा-बुध: बुध राजा हो तो पृथ्वी पर अधिक वर्षा, घर-घर में विवाहादि मंगल कार्य संपन्न होते हैं | लोग देवता तथा ब्राह्मणों की पूजा करते हैं, जनता स्वस्थ सुभिक्ष तथा धन-धान्य से पूर्ण सुखी रहेगी |

मंत्री चंद्र: यदि मंत्री चंद्र हो तो पृथ्वी बहुत प्रकार के फसलों से युक्त होगी, जनता सुखी होगी, मेेघ अच्छी वर्षा करेंगे | सभी जगहों पर सुख-शांति का वातावरण होगा |

सस्येश गुरु: यदि सस्येश गुरु हो तो सभी प्रकार की सुख सुविधा प्राप्त होगी |शास्त्रोक्त कार्य होंगे, कृषि के उत्पादन में वृद्धि होगी, रस पदार्थ तथा दूध इत्यादि के उत्पादन में वृद्धि होने से धन संपत्ति की बढ़ोतरी होगी |

रसेश-शनि: शनि के रसेश होने से रस पदार्थों का नाश तथा वर्षा का अभाव तथा रोगों की अधिकता, गौ, हाथी, घोड़े, बकरी, गधे तथा ऊटों का नाश होगा एवं जनपदों में मनुष्य रस पदार्थों से रहित रहेंगे |

नीरसेश-गुरु: नीरसेश-गुरु के होने से हल्दी आदि पीले पदार्थ, पितांबरादि वस्त्रों में सबकी रुचि होती है |

मेघेश-चंद्र: यदि मेघेश-चंद्र हो तो पृथ्वी पर उत्तम वर्षा होगी, राजाओं में खुशी तथा प्रजा सदा सुखी रहती है |

धान्येेश-बुध: यदि धान्येेश-बुध हो तो पृथ्वी बहुत धान्य से युक्त तथा रस पदार्थों में महंगी आएगी राजा लोग नीतिपूर्वक कार्य करेंगे |

दुर्गेश चंद्र: इस वर्ष दुर्ग का स्वामी चंद्रमा है | अतः सुव्यवस्थित शासन से जनता प्रसन्न रहेगी | बहुत वर्षा होगी, गोरस, ईख तथा रस पदार्थो का उपभोग होगा लोगों द्वारा शासकों का यशोगान किया जाता है |

धनेश गुरु: यदि धनेश गुरु हो तो व्यापारी तथा फूल के रजगारी को लाभ, वृक्ष फल फूल से सुशोभित तथा मनुष्य विविध द्रव्यों से युक्त रहेंगे |

फळेश-सूर्य: यदि फळेश सूर्य हो तो पृथ्वी वृक्षों के फल से फल फूल से सुशोभित, फल के उपयोग से जनता प्रसन्न, मघ अच्छी वर्षा करते हैं, कहीं-कहीं बहुत अधिक वर्षा होने की संभावना होती है |

संवत्सर परिचय – sanvatsar parichay

9 मेघों के मध्य सांवर्त नामक मेघ: सांवर्त नामक मेघ में वायु की अधिकता होती है |

द्वादश मेघों के मध्य ‘वृष’ नामक मेघ: वृष मेघ में अतिवृष्टि, मूषक, टिड्डी आदि से कृषि का नाश होता है |

रोहिणी निवास पर्वत में: यदि रोहिणीनिवास पर्वत पर हो तो कम वर्षा होती है|

संवत्सर निवास कुम्हार के घर: यदि संवत्सर निवास कुम्हार के घर हो तो वर्ष मध्यम होता है |

समय वाहन ‘दोला’: यदि समय वाहन दोला हो तो पृथ्वी पर हाहाकार सभी देशों में दुर्भिक्ष तथा सर्वत्र संग्राम जैसी स्थिति उत्पन्न होती है |

संवत्सर परिचय – sanvatsar parichay

विन्ध्योत्तरवासियों के लिए विशोत्तरी मत से लाभ-खर्च का चक्र

Vishottari Income & Expenditure chakra

विंध्य से दक्षिणवासियों के लिए अष्टोत्तरी मत से लाभ खर्च का चक्र

Astottari Income & Expenditure Chakra
संवत्सर परिचय – sanvatsar parichay

|| आय-व्यय का फल जानने का तरीका ||

चतुर्युग व्यवस्था के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

दिए हुए कोष्टक में अपनी राशि के नीचे लिखे आय-व्यय को जोड़कर 1 घटा देना चाहिए | शेष में 8 का भाग दें | शेषफल 1 से लाभ, 2 से सुख, 3 से क्ळेश, 4 से रोग, 5 से लोकोपवाद, 6 से सम्मान, 7 से विजय, शेष 8 और 0 बचे तो हानिकारक होता है |