शिव तांडव स्तोत्रम

शिव तांडव स्तोत्रम- The Best Stotram sung by Ravana many 1000 years ago

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शिव तांडव स्तोत्रम की रचना

शिव तांडव स्तोत्रम
शिव तांडव स्तोत्रम

पुराणों के अनुसार जब रावण समूचे कैलाश पर्वत को अपने हाथों में उठाकर, लंका की ओर ले जाने लगा | उस समय, उसे अपनी शक्ति पर पूरा अहंकार आ गया | उसका यह स्वरूप भगवान शिव को पसंद नहीं आया और भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत को दबा दिया | जिसकी वजह से रावण का हाथ दब गया और वह पीड़ा से छटपटाने लगा | उसका अहंकार पल भर में चकनाचूर हो गया और साथ ही उसे अपनी गलती का एहसास भी हुआ | अतः कैलाश पर्वत जहां था वही अवस्थित रह गया | उसके भक्तगणों ने भगवान शिव का ध्यान इस ओर खीचने के लिए वे जोर से चिल्लाये की |

रावण भगवान शिव का अर्तनाद करने लगा और भोले शंकर से क्षमा मांगी और उनको खुश करने के लिए, वह भगवान शिव की प्रशंसा में शिव तांडव स्तोत्रम् का यह गीत गाया जो कालांतर में शिव तांडव कहलाया | रावण के इस स्तुति से भगवान शिव इतना प्रसन्न हुए कि उन्होंने ना केवल रावण को सोने की लंका वरदान स्वरूप दी, बल्कि, संपूर्ण ज्ञान, विज्ञान तथा अमर होने का वरदान भी दे दिया | धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव ताण्डव स्तोत्रम सुनने मात्र से ही व्यक्ति सुख, समृद्धि और संतान आदि की प्राप्ति करता है | रावण शिव तांडव स्तोत्रम अति लोकप्रिय है | यह पंचानंद में आवत है | सुन्दर भाषा एवं काव्य-शैली के कारण, यह स्तोत्रं विशेषकर शिवस्तोत्रों में विशिष्ट स्थान रखता है।

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शिव तांडव स्तोत्रम
शिव तांडव स्तोत्रम

शिव तांडव स्तोत्रम

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं, चकारचंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी, विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके, किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर, स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि, कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा, कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे, मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

श्रावन महीने में ॐ जय शिव ओंकारा के भजन गाकर ईश्वर की भक्ति का आनंद प्राप्त करें..

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर, प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंग राज मालया निबद्ध जाट जूटकः, श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधु शेखरः ॥5॥

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा, निपीत पंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं, महाकपालि संपदे शिरोजटालमस्तू नः ॥6॥

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल, द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक, प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर, त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः कलानिधान बंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं सुने और हर बाधाओं को दूर करें

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा, विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं, गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी, रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं, गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर, द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल, ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो, र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

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कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका, निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं, परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी, महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः, शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं, पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं, विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं, यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां, लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

॥ इति शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌॥

ग्रहों की शान्ति के लिए कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं को अवश्य पढ़े, क्लिक करें

Shiv Tandav Stotram Lyrics

शिव तांडव स्तोत्रम

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