माँ दुर्गा

दुर्गापूजा-2020 में घोड़ा नहीं, झुला है माँ दुर्गा का असली वाहन

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Maa Durga’s vehicle is not a horse, it’s a swing in 2020

माँ दुर्गा
दुर्गापूजा-2020

माँ दुर्गा का दिव्य स्वरूप (Divine form of Maa durga): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवती दुर्गा को ही परम शक्ति और सर्वोच्च देवी माना जाता है| माँ दुर्गा के कई स्वरूप हैं – दुर्गा, काली व पार्वती। मुख्य रूप “गौरी” हैं और वे भगवान शिव की पत्नी है| जिनकी तुलना परम ब्रह्मम से की जाती है| माँ दुर्गा को आदि शक्ति, योगमाया व बुद्धितत्व की जननी बताया गया है| जिन ज्योतिर्लिंगों में माँ दुर्गा की स्थापना होती है, उनको सिद्धपीठ कहतें हैं और उन तीर्थ स्थानों का इतना महत्व है कि वहाँ मांगे गए हर मुराद पूर्ण होते है।

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वे अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से सबकी रक्षा करने वाली परम कल्याणकारी देवी हैं और उन्होंने शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाले राक्षसरूपी शक्तियों का विनाश करने के लिए ही जन्म लिया था| जिन्होंने महिषासुर जैसे राक्षस का बध करने के लिए दुर्गा का रूप धारण किया| माँ दुर्गा, आठ भुजाओं से युक्त हैं और एक सिंह (शेर) पर सवार है| उनका रूप दिव्य है|

लावण्यमयी मां के हर भुजाओं में अदभुत शक्ति है और उनके सभी हाथों में दिव्य शस्त्र है जो कि अतुलनीय है| यह सभी शस्त्र उन्हें महिषासुर जैसे राक्षसों का वध करने के लिए देवताओं द्वारा प्रदान किया गया था और इन सभी शस्त्रों में देवताओं की अद्भुत शक्ति का समावेश है जो कि माँ को और भी बलशाली बना देता है|

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पूजा का आह्वान (Call of worship): सारे विश्व में माँ दुर्गा की पूजा करने वालों की संख्या विशाल है| माता के आगमन के दो महीने पहले से ही पूरे भारतवर्ष में बड़ी संख्या में लोग, माँ की पूजा के लिए विशाल मंडप बनाने में लग जाते हैं और नवरात्रि के पहले दिन से ही घरों में घट स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा की पूजा और उपवास आरंभ कर दी जाती हैं और पंचमी तक हर पंडालों में, माँ दुर्गा की भब्य प्रतिमा स्थापित कर दी जाती है और उसी दिन से ही पूजा का आरंभ हो जाता है जो कि पूरी दशमी तक चलता है|

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इस बार नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तारीख शनिवार,17 अक्टूबर से शुरु हो रहा हैं हालांकि प्रत्येक वर्ष यह महालया के समाप्त होने के अगले दिन से ही शुरु हो जाता था| पर इस बार मलमास ने पितृपक्ष और नवरात्रि के बीच करीब एक महीने का अंतर पैदा कर दिया है| ऐसे में माँ दुर्गा के आगमन में करीब एक महीने की देरी हुई है| अब लोगों में माँ दुर्गा की भक्ति के लिए बेसब्री बढ़ती जा रही है, परंतु वक्त का पहिया तो ईश्वर के द्वारा घूमता है| मनुष्य का अपना कोई वजूद नहीं होता| बेसब्री और उत्साह तो लोगो में हर वर्ष ही रहता है, परन्तु यह वर्ष एक ख़ास है|

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माँ दुर्गा की पूजा में, हर किसी में एक जूनून रहता है कि माँ की पूजा में कोई कमी न रह जाए, इसलिये भक्तगण, माँ की पूजा में, माँ की रसोई से लेकर पूजा संपूर्ण होने तक हर तरह की सावधानियाँ बरत्ते हुए, छुआछूत इत्यादि का विशेष ख्याल रखते हैं| माँ दुर्गा के हर भोग को बनाने के पहले घरो या पंडालो में स्त्रियाँ बार-बार नहाधोकर स्वच्छ कपडे पहनकर रसोई में प्रवेश करती हैं|

भोग में पूड़ी, हलवा, सब्जी, पायस, मिठाई इत्यादि बड़े साफ़-सुथरे परिवेश में तैयार करती हैं| फल-फुल का अम्बार लगा रहता है| हर कोई नूतन वस्त्र पहनकर माँ की उपासना में दिलोजान से लगा रहता है| नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन पर हर साल लोगो की विशेष नज़र रहती हैं क्योंकि माँ दुर्गा इस खास मौके पर किस वाहन पर सवार होकर पृथ्वी पर आएंगी, यह लोगो के लिए बड़ी उत्सुकता का विषय रहता है क्योंकि माँ दुर्गा के वाहन ही, उन्हें आने वाले भबिष्य का संकेत देते हैं|

अभी तक बहुत सालों तक माँ दुर्गा कभी हाथी पर, कभी घोड़े पर, कभी नौका या कभी डोली पर आती थी| परंतु इस बार माता का आगमन जिस सवारी से होने जा रहा है, वह लोगो के लिये एक चर्चा का विषय हैं|

माँ दुर्गा
swing means instability

माँ दुर्गा का वाहन

माँ दुर्गा का वाहन (Maa Durga’s vehicle): बंगाल के ज्योतिषियों और महाविद्वानों के अनुसार, माँ दुर्गा इस बार दोलना पर आ रही हैं और वे सब तहस-नहस कर देंगी, यह उनके वाक्य हैं| अब आप समझ लीजिये| यहाँ मैं अपने पाठकों को यह बताना चाहूँगा कि दोलना झूले को बोला जाता है, चूँकि झूले का कोई सॉलिड बेस नहीं होता और स्थिर भी नहीं रहता| ऐसे हालात में यह लोगो के मन को आशंकाओ से भर देता है|

यह लोगो के स्थायित्व के लिए खतरों का आभास देता है क्योंकि नौका, हाथी या डोली, हर एक वाहनों का कहीं न कहीं तो कुछ बेस है| परंतु झूला हर समय डोलता रहता है| कभी स्थिर नही रहता और जो भी उसपर सवार होता है, वह अन्दर से डरा रहता है कि कहीं हम गिर न पड़े| हालाँकि हर बड़ी न्यूज़ वेबसाइटों ने माँ के वाहन के बारे में घोड़े का उल्लेख किया है| मुझे समझ में नहीं आता कि उनके कैलकुलेशन का बेेस क्या है|

यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा क्योंकि पुरे पश्चिम बंगाल में करीब 1000-2000 करोंड़ रुपये तो पूजा में फूंक दिए जाते हैं जो कि पुरे भारत का 50% होना चाहिए| बंगाल के ज्योतिषियों और महाविद्वानों का मत गलत तो नहीं हो सकता| यह फ़िलहाल एक कन्ट्रोवर्सी है हालाँकि मैंने विद्वानों से reconfirm किया है|

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माँ दुर्गा की वापसी का वाहन (Return vehicle of maa durga): बंगाल के महाविद्वानों के अनुसार, माँ दुर्गा पिछली बार हाथी पर आयी थी और उनका हाथी यहाँ मौजूद है, अतः वे वापस उसी हाथी से जाएँगी और झुला यहीं रख जाएँगी और अगले साल जिस भी सवारी से वे आएँगी, वह उसे रखकर, झूले पर वापस लौट जायेंगी| धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यही सत्य है|

साल 2020 हम सबके लिए बड़ी चुनौतियों से भरा साल रहा हैं| पांच-छ: महीने तो करोना ने ही गटक लिए और साथ ही बहुत बड़ी तादाद में लोग मारे गए| लोगो के काम-धंधे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं| फिर ऊपर से अंपन तूफान जैसे चक्रवाती तूफानों ने हम सबको हिला डाला| विशाल मात्रा में तबाही हुई है| अब और देर बर्दास्त नहीं| माँ के वाहन झूले ने लोगो के मन में एक भय का संचार जरुर पैदा कर दिया है|

पूजा हम सबके लिए एक बड़ी उम्मीद थी| परंतु यह इशारा लोगों के आने वाले जीवन में एक संशय को जन्म देता है| हालाँकि ज्योतिष शस्त्रों के अनुसार, इस साल फसल की पैदावार अच्छी होगी| यह एक शुभ संकेत है| हालाँकि इस पृथ्वी पर हर एक मनुष्य सांसारिक है, बाल- बच्चे हैं, परिवार है| हर कोई अपने कर्म-क्षेत्र से जुड़ा हुआ हैं| लोग करीब 15 महीनो से मंदी और करोना से परेशान होकर घर बैठे खा रहे हैं और ऊपर से रोजगार का छीन जाना, लोगों के लिए वैसे ही संकट का कारण बना हुआ है|

Watch Jasraj Joshi on gaana.com “सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नचि”

श्री पंचांग लोगो से यह आग्रह करता है कि वे इन बातों में न उलझे और माता की भक्ति में खुद को दिलो-जान से समर्पित कर दें, हर कुछ अच्छा होगा क्योंकि भगवान जब धरती पर आते हैं तो खुशियां लेकर आते हैं और मां दुर्गा एक खुशी का द्योतक है| सभी भक्तों के लिए यह एक खुशियों से बढ़कर और क्या हो सकता है|

इतनी बड़ी संख्या में जब पूजा होगी तो माँ का आशीर्वाद जमकर बरसेगा| अतः लोगों को इन सब बातों पर विशेष कान देने की जरुरत नहीं है| बस माँ की भक्ति में कोई कमी न रह जाए| उन्हें इन बातों पर ज्यादा जोर देने की जरुरत है| बस अपने दिल को पवित्र रक्खे| हमे खुस रखनेवाला हमारे ईश्वर हैं|

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माँ की विशेष आराधना के लिए महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रं का पाठ सुने और महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रं पाठ के लाभ के बारे में जाने| जय अम्बे गौरी आरती से माता की आरती करें और दुर्गा पूजा के दौरान देवी ब्रह्मचारिणी जी की आरती का भी पाठ माँ दुर्गा की भक्ति के लिए अवश्य करें और आरती में नीचे दिए गए YouTube Link पर सारे दिन विडियो का आनंद ले और श्री पंचांग की वेबसाइट पर निगाह रखें| हम माँ दुर्गा की पूजा तक आपके लिए हर जरुरी सूचनाएं और माँ से जुडी हर खबरों को आप तक पहुचाने के लिए दृढ संकल्प है|

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पूजा की तिथी (Date of worship): धार्मिक मान्यातओं के अनुसार, इस साल पूजा शुक्रवार 23 अक्टूबर 2020, (सप्तमी), शनिवार 24 अक्टूबर 2020 (अष्टमी), रविवार 25 अक्टूबर 2020 (नवमी और दशमी) सोमवार 26 अक्टूबर, 2020 सिर्फ सुबह 11 बजे तक रहेगा|

इसका मतलब, पूजा का वक्त 4 दिन ही रहेगा पर सोमवार दशमी का दिन पूरा नहीं मिलेगा| अतः माँ की विदाई के पहले, सिंदूर-भरण का कार्य सुबह 11 बजे तक संपूर्ण कर लेना पड़ेगा| सोमवार थोडा प्रेशर का दिन रहेगा और इस वजह से वक्त के ऊपर गौर करना जरुरी है| वक़्त में थोडा उतर-चढ़ाव संभव है| Precise Timing की सुचना, निश्चित वक़्त पर दे दी जायेगी| हमारे वेबसाइट को फॉलो करते रहें|

जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता की आरती के लिए इस लिंक पर जाये

भविष्यवाणी (Prediction): श्री पंचांग के अनुसार, लोगों की स्थिति में बड़ा सुधार, बुधवार 25 नवम्बर कार्तिक शुक्ल एकादशी (तुलसी विवाह) के बाद ही देखने को मिलेगा| इससे सभी ग्रह-राशि वाले लाभान्वित होंगे और जिंदगी की रफ्तार पहले की ही तरह चाल पकड़ लेगी| हालांकि अब बाजार चालू हो रहा है, परन्तु खरीददारी में कमी रहेगी| लोग खर्च करने के पहले सोचेंगे| मां दुर्गा का आगमन, हम लोगों के लिए अति सुखदायी और मंगलमय होगा| श्री पंचांग ईश्वर से अपने पाठकों के सुंदर और सुनहरे भबिष्य की कामना करता है|

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