बजरंग बाण

श्री बजरंग बाण- overcome your fear and crisis

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श्री बजरंग बाण

श्री बजरंग बाण- हनुमान जी हम सबके आराध्य देव है | इस कलयुग में तो उन्ही का बोलबाला है| हनुमान जी की पूजा-आराधना करने से मनुष्य हर प्रकार के भय से मुक्त होता है | हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो कलयुग में भी पृथ्वी पर विराजमान हैं और सर्वदा अपने भक्तों की मदद करते हैं | हनुमान जी की नित्य पूजा करने से मनुष्य के पराक्रम और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और उन्हें बल मिलता है | उनकी क्षमता और पराक्रम से हम सभी वाकिब है | ज्यादातर लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। साथ ही, यदि बजरंग बाण का पाठ भी किया जाए तो इससे भक्तों को बजरंगबली की असीम कृपा की प्राप्त होगी, यह निश्चित है |

बजरंग बाण MP3 सुने और भक्ति रस का आनंद लें

Lord Hanuman worshiping Sree Ram
बजरंग बाण का पाठ

हर मंगलवार को सम्पूर्ण सुंदरकांड का पाठ करें

हनुमान जी भगवान श्री राम चन्द्र जी के प्रिय सेवक थे | रावण के साथ संग्राम में उन्होंने भगवन श्री राम की पुरी भक्ति और श्रद्धा के साथ सेवा की | वह अतुलनीय है और कहते हैं कि यदि हनुमान जी को खुश करना है तो शनिवार को श्री बजरंग बाण और हनुमान चालीसा का पाठ अतिसुख्दायी है और मंगलवार को सम्पूर्ण सुंदरकांड का जप करने से हनुमान जी की कृपा बरसती है| जो इंसान बजरंग बाण का पाठ करता है | उसे हनुमान जी उनके हर कार्यों में सफलता देते हैं| यहाँ तक कि किसी भी शुभ कार्य में हनुमान जी की आरती भी अवश्य गाई जाती है | तुलसीदास द्वारा रचित, श्री बजरंग बाण का पाठ अति लोकप्रय है |

यदि आप भी श्री बजरंग बाण, हनुमान चालीसा व सम्पूर्ण सुंदरकांड का पाठ करते हैं तो हनुमान जी आपकी अवश्य रक्षा करेंगे और यदि आप ज्यादा व्यस्त हैं और पाठ नहीं कर पातें है तो आप घर, कार्यालय अथवा अपनी दुकानों में ह्रदय से उनकी आरती का लिरिक्स अपने मोबाइल पर सुने, इससे नकारात्नक उर्जा का विनाश होगा | आप सब की ग्रह दशा भी कट जाएगी क्योंकि हनुमान जी से सभी ग्रह डरते हैं, इसीलिए शनि-ग्रह दशा वाले खास करके शनिवार को श्री बजरंग बाण का पाठ करें | उनका अवश्य कल्याण होगा |

कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं सुने और हर बाधाओं को दूर करें

श्री बजरंग बाण का पाठ

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान,
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान,
जय हनुमंत संत हितकारी सुन लीजै प्रभु अरज हमारी,
जन के काज बिलंब न कीजै आतुर दौरि महा सुख दीजै,
जैसे कूदि सिंधु महिपारा सुरसा बदन पैठि बिस्तारा,
आगे जाय लंकिनी रोका मारेहु लात गई सुरलोका ||

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परमपद लीन्हा,
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा, अति आतुर जमकातर तोरा,
अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेटि लंक को जारा,
लाह समान लंक जरि गई, जय जय धुनि सुरपुर नभ भई,
अब बिलंब केहि कारन स्वामी, कृपा करहु उर अंतरयामी,
जय जय लखन प्रान के दाता, आतुर ह्वै दुख करहु निपाता ||

जै हनुमान जयति बल-सागर, सुर-समूह-समरथ भट-नागर,
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले, बैरिहि मारु बज्र की कीले,
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा,
जय अंजनि कुमार बलवंता, शंकरसुवन बीर हनुमंता,
बदन कराल काल-कुल-घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक,
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर, अगिन बेताल काल मारी मर ||

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इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की,
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै, राम दूत धरु मारु धाइ कै,
जय जय जय हनुमंत अगाधा, दुख पावत जन केहि अपराधा,
पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत कछु दास तुम्हारा,
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं, तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं,
जनकसुता हरि दास कहावौ, ताकी सपथ बिलंब न लावौ ||

जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होय दुसह दुख नासा,
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं, यहि औसर अब केहि गोहरावौं,
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई, पायँ परौं, कर जोरि मनाई,
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता,
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल,
अपने जन को तुरत उबारौ सुमिरत होय आनंद हमारौ ||

यह बजरंग-बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिरि कवन उबारै,
पाठ करै बजरंग-बाण की, हनुमत रक्षा करै प्रान की,
यह बजरंग बाण जो जापैं, तासों भूत-प्रेत सब कापैं,
धूप देय जो जपै हमेसा, ताके तन नहिं रहै कलेसा,
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान,
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान ||

सुंदरकांड के पाठ मंगलवार को करें और प्रभु की असीम कृपा प्राप्त करें |

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