पंचक

पंचक तिथी 2021-Learn the importance and avoid these timings

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Know about Panchak

पंचक: हमारे हिंदू-संस्कृति में, हर एक कार्य करने के पहले मुहूर्त देखा जाता है और उसी अनुरूप किसी भी शुभ कार्य की प्रक्रिया आरंभ की जाती है | शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य फलदायक होते हैं और बिना मुहूर्त देखे कार्य को करने में नुकसान की पूरी संभावना है| इसीलिए खास करके शुभ-मुहूर्त के दौरान पंचक और भद्रा का खास महत्व रखा जाता है, जिससे कुछ अशुभ ना हो |

Panchak inner
Importance of Panchak

अतः उसके लिए हमे पंचांग की आवश्यकता होती है | पंचांग के द्वारा वार, तिथि, नक्षत्र, करण तथा योग की जानकारी हम प्राप्त करते हैं और मुहुर्त निकालने के दौरान हम पंचांग के मुहूर्त के साथ-साथ पंचक का विशेष ध्यान रखते हैंं, क्योंकि यह तिथी पुरी तरह अशुभ है |

पंचक का योग

पंचक लगने का समय जब प्रारंभ होता है तो वह हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है | शास्त्रों के अनुसार, पांच ऐसे नक्षत्र हैं जिनके विशेष संंयोग के कारण पंचक का योग बनता है | यह 5 नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए पुरी तरह वर्जित हैं | यही वजह है कि विशेष कार्य को पूर्ण करने के पहले पंचक का हमें विशेष ध्यान रखना पड़ता है |

पंचक की गणना

वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र-चक्र में 27 नक्षत्रों का वर्णन है | इन नक्षत्र के आधार पर 2 राशियों में सभी 27 नक्षत्रों को बिभक्त किया गया है | इसके अनुसार एक राशि में लगभग सवा दो नक्षत्र आते हैं और एक नक्षत्र का मान है 13 घंटे 20 मिनट और उनमें से प्रत्येक नक्षत्र के चार-चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण 3 अंश 20 मिनट का होता है एक राशि का मान 30 अंश का होता है और जब चंद्रमा अपनी गति के अनुरूप जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं तो उसी समय पंचक लगते हैं |

क्यों ज्योतिष, शुभ-मुहुर्त निकालते वक़्त, पंचक तिथी पर ख़ास निगाह रखते है, अवश्य जाने

नक्षत्र का विवरण: चंद्रमा जैसे ही कुंभ राशि में प्रवेश करता हैं, धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण का प्रारंभ हो जाता है और उसके बाद शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती से होकर चंद्रमा आगे बढ़ जाता हैं | इस प्रकार, इन 5 नक्षत्रों में परिक्रमा करने में चंद्रमा को लगभग 5 दिन का वक़्त लगता है और यही 5 दिन और यही पांच नक्षत्र पंचक कहलाते हैं| 27 दिन में चंद्रमा सभी राशियों में भ्रमण करते हुए दोबारा उसी राशि में प्रवेश कर जाता हैं, इसलिए 27 दिन की आवृत्ति के बाद उन्हें पंचक लगते हैं |

पांच नक्षत्रों का योग: पंचक में 5 नक्षत्रों का योग होता है अतः कहा जाता है कि इस तिथि में यदि कोई भी कार्य किया जाता है तो उसकी 5 बार पुनरावृत्ति होती है, जैसे यदि पंचक काल में किसी की मौत हो जाए और उसका दाह-संस्कार यदि पंचक को ध्यान में रखते हुए ना किया जाए तो उसी परिवार में पांच व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है |

इस दोष को दूर करने के लिए, दाह संस्कार के पहले, आटे के पांच पुतले बनाकर बकायदा नियम के मुताबिक, उसका भी दाह संस्कार किया जाता है| यह संभव है कि यह प्रक्रिया भारत के विभन्न प्रान्तों के अपने रिवाज़ के मुताबिक पालन किया जाना चाहिए |

पंचक के प्रकार को समझे

यह पांच प्रकार के होते हैं| यदि किसी खास दिन से कोई पंचक शुरू होता है तो वह अलग ही प्रभाव में माना जाता है, जैसे:

Raj Panchak : जो सोमवार के दिन शुरू होते हैं वे राज पंचक कहळाते हैं | यह पंचक शुभ माने जाते हैं और इनके प्रभाव से आने वाले 5 दिन सफलता और सरकारी कामकाज से लाभ दिलवा सकतें हैं तथा संपत्ति से जुड़े काम करने के लिए भी यह सबसे उत्तम माना गया है |

Rog Panchak : यदि किसी पंचक का प्रारंभ रविवार के दिन होता है तो उसे रोग पंचक कहते हैं | इस तिथी में आने वाले 5 दिन विशेष रूप से कष्टकारक होते हैं और मन से मानसिक परेशानियों को बढ़ावा देते हैं ऐसे पंचक में शुभ कार्य को सर्वथा त्यागना उचित है क्योंकि इसमें अशुभ होने की संभावना बनी रहती है |

Chor Panchak : शुक्रवार के दिन शुरू होने वाले Panchak को चोर पंचक कहा जाता है| यह खासकर यात्रा के लिए वर्जित माने जाते हैं हालाँकि किसी भी प्रकार का व्यापार अथवा लेन-देन करना भी इसमें वर्जित बताया गया है|

Agni Panchak : मंगलवार के दिन शुरू होने वाले Panchak अग्नि पंचक कहलाते हैं | खासकर, इसके क्रियाशील रहते वक़्त, आप कोर्ट-कचहरी, पुलिस या मुकदमें जैसे कार्यो के फैसलों के लिए प्रयासरत रह सकते हैं, पर पंचक अशुभ माना जाता है, अतःकिसी प्रकार का निर्माण-कार्य या मशीनरी के द्वारा काम करना अशुभ बताया गया है |

Mrityu Panchak : जिस Panchak की शुरुआत शनिवार के दिन होती है तो वह मृत्यु पंचक कहलाता है | इसके दौरान मृत्यु तुल्य कष्ट की प्राप्ति संभव है और यह पूरी तरह अशुभ माना गया है | इस दौरान आपको किसी भी प्रकार के कष्टकारी कार्य और जोखिम भरे कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योंकि इस पंचक के प्रभाव से एक्सीडेंट होने की पूरी संभावना है | ऐसे पंचक में पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है |

खासकर जब यह तिथी बुधवार या बृहस्पतिवार को शुरू होता है तो उनमें उपरोक्त किसी भी बातों का पालन करना आवश्यक नहीं है| इन 2 दिनों में शुरू होने वाले तिथी के दौरान उपरोक्त बताए गए कार्यों के अलावा किसी भी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पंचक के दौरान निषिद्ध कार्य

हिंदू धर्म में, शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं, जिन्हें Panchak के दौरान कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि इनका समय सटीक नहीं होता |

  1. इस तिथी के दौरान लकड़ियाँ अथवा इंधन का भंडारण नहीं करना चाहिए|
  2. यदि आपका घर मेें निर्माण कार्य चल रहा हो तो इस तिथी के दौरान घर या मकान की छत को ढालने का काम रोक देना चाहिए|
  3. इस तिथी के समय विशेष रूप से किसी भी प्रकार का पलंग, न ही खरीदना चाहिए और न ही बनवाना चाहिए, बिस्तर का दान करना भी कष्टदायक माना जा सकता है|
  4. इस तिथी के दौरान दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना वर्जित है|

उपरोक्त कार्यो को छोडकर, बाद बाकि सभी कार्य Panchak में किये जा सकते हैं |

पंचक के दौरान किये जाने वाले कार्य

Panchak के दौरान किये गए सभी कार्य अशुभ नहीं होते बल्कि कई कार्यों को करने के लिए पंचक अत्यंत शुभकारी माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से हैं वे कार्य, जो Panchak के दौरान किए जा सकते हैं|

Panchak में जो नक्षत्र बनते हैं उनमे कुछ विशेष योगो का निर्माण भी होता हैं जैसे कि धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा, भाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र जो यात्रा करने, मुंडन कार्य के लिए तथा व्यापार आदि कार्यों के लिए शुभ माना गया हैं| उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, वार के साथ मिलकर सर्वार्थ सिद्धि योग बनाता है|हालांकि हम पंचक को अशुभ की संज्ञा देते है लेकिन पंचक के दौरान अनेक शुभ कार्य जैसे की सगाई समारोह, विवाह आदि शुभ कार्य किए जाते हैं |

तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती यदि रविवार को दिन में पड़े तो उनमें विशेष प्रकार के शुभ योग बनते है और उनमे चर, स्थिर और प्रवर्ध मुख्य है इन योग में व्यक्ति को सफलता प्राप्त होता है तथा उसे धन की भी प्राप्ति होती है |

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक नक्षत्रों में धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल-संज्ञक माने जाते हैं | ऐसे नक्षत्रों के दौरान कोई भी गतिशील कार्य का बिजनेस, यात्रा व मशीनरी, वाहन खरीदने से संबंधित कार्य वर्जित है और अशुभ माने गए हैं, ऐसी अवस्था में गतिशील कार्य को त्याग दें | वहीं दूसरी ओर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र स्थिर-संज्ञक है, इसमें गृह-प्रवेश, शांति-पूजन करना बीज बोना तथा जमीन से जुड़े कार्य सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं |

अंतिम नक्षत्र रेवती मैत्री-संज्ञक है इसलिए इस नक्षत्र में किसी भी तरह के वाद विवाद का निपटारा व्यापार अथवा कपड़े से संबंधित कार्य नए आभूषण खरीदने का कार्य आदि शुभ कार्य है जो कि सफलता पूर्वक किए जा सकते हैं | यह वर्जित नहीं है |

पंचक के दौरान सावधानियां

इस तिथी के दौरान, ध्यान रखें, शास्त्रों में कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका पंचक के द्वारा विशेष रूप से ख्याल किया जाता है |

  1. जिस समय धनिष्ठा नक्षत्र का पंचक हो, उस समय किसी भी प्रकार की इंधन सामग्री एकत्रित ना करें | उदाहरण के लिए लकड़ी, घास, तेल इत्यादि | क्योंकि ऐसा करने से आग का खतरा बढ़ सकता है |
  2. इस तिथी के दौरान, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसका दाह-संस्कार करने के पहले, किसी योग्य ब्राह्मण या ज्योतिष से अवश्य सलाह लेना चाहिए और उन्ही की देखरेख में ही दाह संस्कार करना चाहिए, अन्यथा यह मृत्यु का संकट उस परिवार पर मंडरा सकता है और इसमें पांच व्यक्ति लपेटे में आ सकते हैं |
  3. इस तिथी के दौरान दक्षिण दिशा की ओर कभी यात्रा नहीं करें क्योंकि दक्षिण की दिशा यम और मृत्यु की दिशा मानी गई है ऐसे में दक्षिण की ओर भ्रमण करना हानिकारक और कष्टदायक हो सकता है
  4. पंचक में जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो तो घर की छत कभी नहीं बनवानी चाहिए | ऐसा माना जाता है कि इससे धन की हानि की संभावना, परिवार में क्लेश भी बढ़ सकता है|
  5. धनिष्ठा नक्षत्र के पंचक में अग्नि का भय होता है अतः इस दौरान पलंग से सम्बंधित कार्य न करें, शतभिषा नक्षत्र में कलह संभव है |
  6. उत्तराभाद्रपद के पंचक में धन की हानि और शारीरिक कष्ट की संभावना है और पूर्वा भाद्रपद के पंचक में रोग की संभावना होती है तथा इसके अलावा रेवती नक्षत्र में मानसिक कष्ट की संभावना प्रबल होती है |
पंचक तिथी-2021 (Panchak tithee-2021)
Panchak begins atPanchak ends at
January 15, 2021-Friday at 05:00 PMJanuary 20, 2021, Wednesday at 12:40 PM
February 12, 2021, Friday at 02:10 AMFebruary 16, 2021, Tuesday at 09:00 PM
March 11, 2021, Thursday at 09:18 AMMarch 16, 2021, Tuesday at 04:46 AM
April 7, 2021, Wednesday at 02:55 PMApril 12, 2021, Monday at 11:35 AM
May 4, 2021, Tuesday at 08:40 PMMay 9, 2021, Sunday at 05:35 PM
June 1, 2021, Tuesday at 03:50 AMJune 5, 2021, Saturday at 11:22 PM
June 28, 2021, Monday at 12:55 PMJuly 3, 2021, Saturday at 06:18 AM
July 25, 2021, Sunday at 10:42 PMJuly 30, 2021, Friday at 02:00 PM
August 22, 2021, Sunday at 07:51 AMAugust 26, 2021, Thursday at 10:25 PM
September 18, 2021, Saturday at 03:22 PMSeptember 23, 2021, Thursday at 06:48 AM
October 15, 2021, Friday at 09:10 PMOctober 20, 2021, Wednesday at 01:59 PM
November 12, 2021, Friday at 02:48 AMNovember 16, 2021, Tuesday at 08:18 PM
December 9, 2021, Thursday at 10:05 AMDecember 14, 2021, Tuesday at 01:58 AM
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अतः इस दौरान जो कार्य निषेध है उनका त्याग कर अन्य शुभ कार्यों का संपादन किया जा सकता है | हमेें आशा हैं कि हमारे पाठक इस लेख को पढ़कर उनसे जरूर कुछ अनुभव प्राप्त करेंगे |

जीवन और मृत्यु के सच को जाने, राजेंद्र तिवारी के द्वारा