नवग्रह स्तोत्रं

नवग्रह स्तोत्रं- Miraculous Mantra for complete safety

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नवग्रह स्तोत्रं के बारे में जाने

नवग्रह स्तोत्रं का पाठ अति फलदायक है| इस स्तोत्र का पाठ करने से जो व्यक्ति ग्रहों के परेशानी और विपद का शिकार है, वह हर विपद से मुक्ति पाएगा| इस स्तोत्रम का पाठ हर सुबह अवश्य करें ताकि आपको ग्रहों के परेशानी से मुक्ति मिल पाए| इसमें नौ-ग्रहों से क्रमश: एक-एक श्लोक के द्वारा पीड़ा दूर करने की प्रार्थना की गई है| अतः आप इसका लाभ प्राप्त करें |

नवग्रह न केवल जातक के भविष्य का निर्धारण करते हैं बल्‍कि जातक के जीवन में अच्छे और बुरे का पल-प्रतिपल आदान-प्रदान भी करते हैं। ग्रह जातक के पूर्व कृत कर्म के आधार पर रोग, शोक, और सुख, ऐश्वर्य का भी प्रबंध करते हैं। पीड़ित जातक को चाहिए कि वह पीड़ित ग्रह के दंड को पहचान कर उक्त ग्रह की अनुकूलता हेतु उक्त ग्रह का रत्न धारण करें और संबंधित ग्रह के मंत्र को जपें तो जातक सुखी बन सकता है। साथ में जातक संबंधित ग्रह के क्षेत्र का दान और उस ग्रह के रत्न की माला से जप करें तो जातक प्रसन्न व संपन्न होगा।

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नवग्रह स्तोत्रं
Navgrah Stotram

नवग्रह स्तोत्रं के जप का लाभ

नवग्रह स्तोत्रं का जप करने वालों से सभी देवता प्रसन्न रहते हैं, ज्योतिष के अनुसार इस पूरे ब्रह्मांड में नौ ग्रह मौजूद हैं, उनके अनुसार सौर्यमंडल में पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, शुक्र, शनि, राहु और केतु इन सबको मिलाकर  नौ-ग्रह हैं, ये मनुष्यो की हर एक इच्छाओं को तृप्त करने में  सहायक हैं, शांति के लिए आपको इनके हर एक मंत्र का 108 बार जप करना होगा तो इससे आपके दोष दूर होंगे, नवग्रह मंत्र का जप करने के लिए विधि-विधान से स्नानादि से निवृत्त होकर, एक सफेद आसन पर बैठ जाएं आसन के नीचे थोड़ा चावल भी रख ले

१) विश्व की रक्षा करने वाले भगवान सूर्य मेरी पीड़ा का हरण करें |
२) अमृत रूपी शरीर वाले तथा अमृत का पान करने वाले चंद्रदेव, मेरी पीड़ा को दूर करें |
३) जगत को दृष्टि देने वाले मंगल देवता जी, मेरे ग्रह-दोष को दूर करें |
४) चंद्रमा के पुत्र बुध, मेरे पीरा का हरण करें |
५) सर्वदा लोक-कल्याण में नीरज रहने वाले विश्वदेव गुरु बृहस्पति मेरी पीड़ा  का हरण करें |
६) हे सूर्यपुत्र भगवान शनि देव, हमारी पीड़ा को दूर करें |
७) विविधरूप तथा वर्ण वाले राहु-देव  मेरी पीड़ा का हरण करें |

नवग्रह स्तोत्र ं का जप करने से, इस ब्रह्मांड में स्थित समस्त नौ-ग्रह, सभी शांत रहते हैं और प्रसन्न होकर जप करने वालें को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं |

हर मंगलवार को सम्पूर्ण सुंदरकांड का पाठ करें

नवग्रह स्तोत्रं

|| अथ नवग्रह स्तोत्रं ||
|| श्री गणेशाय नमः ||

जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं
तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं-(रवि)

दधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवं
नमामि शशिनं सोंमं शंभोर्मुकुट भूषणं-(चंद्र)

धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांतीं समप्रभं
कुमारं शक्तिहस्तंच मंगलं प्रणमाम्यहं-(मंगळ)

प्रियंगुकलिका शामं रूपेणा प्रतिमं बुधं
सौम्यं सौम्य गुणपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहं-(बुध)

देवानांच ऋषिणांच गुरुंकांचन सन्निभं
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिं-(गुरु)

हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरूं
सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं-(शुक्र)

नीलांजन समाभासं, रविपुत्रं यमाग्रजं
छायामार्तंड संभूतं तं, नमामि शनैश्वरं-(शनि)

हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें

अर्धकायं महावीर्यं, चंद्रादित्य विमर्दनं
सिंहिका गर्भसंभूतं, तं राहूं प्रणमाम्यहं-(राहू)

पलाशपुष्प संकाशं, तारका ग्रह मस्तकं
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं, केतुं प्रणमाम्यह-(केतु)

नवग्रहों के रत्न, धातु, मंत्र और जप की संख्या के बारे में जाने और उसका लाभ उठायें

फलश्रुति :
इति व्यासमुखोदगीतं य: पठेत सुसमाहितं |
दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्न शांतिर्भविष्यति |

नर,नारी, नृपाणांच भवेत् दु:स्वप्न नाशनं |
ऐश्वर्यंमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनं |
ग्रहनक्षत्रजा: पीडास्तस्कराग्नि समुद्भवा |
ता: सर्वा: प्रशमं यान्ति व्यासो ब्रुतेन संशय: |
| इति श्री व्यास विरचित आदित्यादि नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णं |

नवग्रह कवच का पाठ

ॐ शिरो मे पातु मार्तण्ड: कपालं रोहिणीपति:। मुखमङ्गारक: पातु कण्ठं च शशिनन्दन:।।
बुद्धिं जीव: सदा पातु हृदयं भृगुनन्दन:। जठरं च शनि: पातु जिह्वां मे दितिनन्दन:।।
पादौ केतु: सदा पातु वारा: सर्वाङ्गमेव च। तिथयोऽष्टौ दिश: पान्तु नक्षत्राणि वपु: सदा।।
अंसौ राशि: सदा पातु योगश्च स्थैर्यमेव च। सुचिरायु: सुखी पुत्री युद्धे च विजयी भवेत्।।
रोगात्प्रमुच्यते रोगी बन्धो मुच्येत बन्धनात्। श्रियं च लभते नित्यं रिष्टिस्तस्य न जायते।।
य: करे धारयेन्नित्यं तस्य रिष्टिर्न जायते।। पठनात् कवचस्यास्य सर्वपापात् प्रमुच्यते।
मृतवत्सा च या नारी काकवन्ध्या च या भवेत्। जीववत्सा पुत्रवती भवत्येव न संशय:।।
एतां रक्षां पठेद् यस्तु अङ्ग स्पृष्ट्वापि वा पठेत्।।

शनि की साढ़ेसाती पढ़े और उन्हें प्रसन्न करें

नवग्रह स्तोत्रं का लिरिक्स सुने

Navgrah Stotram

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