धनतेरस

धनतेरस 2021- Learn what is so important about

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धनतेरस पूजा का विधान

धनतेरस- कार्तिक मास की त्रयोदशी को धनतेरस का विशिष्ट पर्व मनाया जाता है| आज के दिन माता लक्ष्मी जी के पूजन के लिए लोग महीनों से तैयारी करते हैं और साफ सफाई करने के पश्चात सुख समृद्धि और धन प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी जी का पूजन करते हैं| जो आपको साल भर के लिए धन का आगमन का रास्ता खोलते हैं| जिस घर में साफ सफाई होती है, वहां माता लक्ष्मी का आगमन होता है| यहाँ तक की घर का मुख्य द्वार भी अच्छी तरह प्रकार साफ किया जाता है| लोग आज के दिन हल्दी और चावल का घोल पीसकर घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ ओम लिखते है|

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धनतेरस और दिवाली के दिन लोग झाड़ू भी खरीदते हैं| ऐसा कहा जाता है कि झाड़ू माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है| धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है मान्यता यह है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि एक रत्न के रूप में समुद्र मंथन से बाहर आए थे| धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है| इस दिन सोना, चांदी अथवा पीतल का बर्तन इत्यादि खरीदना शुभ माना गया है| इससे घर में लक्ष्मी आती है|

अतः आप अपने सामर्थ्य के अनुसार इसे खरीदें इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप सोना खरीदते हो या पीतल| परंतु बर्तन खरीदना जरूरी है क्योंकि धार्मिक मान्यातओं के अनुसार, धनतेरस के दिन नया सामान खरीदकर घर लाना बेहद शुभ माना गया है और इसका फल आपको अवश्य मिलता है| भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी के दीपक जलाएं उनके चरणों में फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं और प्रसाद ग्रहण करें|

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इस साल आज मंगलवार 2 नवंबर को धनतेरस का त्यौहार मनाया जाएगा| धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 4:58 से लेकर 5:59 तक  है और धनतेरस में शाम 5:28 से 8:07 तक प्रदोष काल रहेगा| पूजा के लिए यह समय काफी उत्तम माना गया है अतः पूजा इसके बीच में ही करें| यदि आप कुछ खरीद नहीं पाए है तो प्रदोष काल में खरीदारी करना शुभ माना गया हैं| संध्या काल में पूजा के वक़्त उत्तर की ओर कुबेर तथा धनवंतरी की स्थापना करें| पूजा मुहूर्त में महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें|

स्थापना के पश्चात माता लक्ष्मी, कुबेर जी और धन्वंतरि को अक्षत्, धूप, रोली, चंदन, सुपारी, पान का पत्ता, नारियल, कमलगट्टा आदि अर्पित करें। फिर इनके मंत्रों का उच्चारण करें और घी का दीपक जलाएं| कुबेर जी को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरी को पीली मिठाई चढ़ाएं और माता लक्ष्मी जी को सफेद बर्फी या किशमिश का भोग लगाएं. और गणेश जी को लड्डू का भोग लगायें और नीचे लिखे ओम कुबेर नमः का जाप करें:

ओम श्रीं, ओम ह्रीं श्रीं, ओम ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:

नीचे लिखे गए धन्वंतरि मंत्र का जप अवश्य करें इससे समृधि आती है :

ओम धन्वंतरये नम:
Om Dhanvantaraye Namah:

ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धनवन्तरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः

Ōma namō bhagavatē mahāsudarśanāya vāsudēvāya dhanvantarāyē:
Amr̥takalaśa hastāya sarvabhaya vināśāya sarvarōganivāraṇāya
trilōkapathāya trilōkanāthāya śrī mahāviṣṇusvarūpa
śrī dhanavantari svarūpa śrī śrī śrī auṣadhacakra nārāyaṇāya namaḥ

श्री लक्ष्मी महामंत्र (Sri Lakshmi Mahamantra)

ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा

‘Om śrīṁ lkīṁ mahālakṣmī mahālakṣmī ēhyēhi sarva saubhāgyaṁ dēhi mē svāhā

मंत्र उच्चारण के बाद घर की तिजोरी या लॉकर की पूजा करें। उसके पश्चात क्रमश: धन, वैभव और आरोग्य की कामना करते हुए प्रार्थना करें। पूजा के अंत में लक्ष्मी जी की आरती, कुबेर की आरती और भगवान धन्वंतरि जी की आरती अवश्य करें। पूजा में चढ़ाए गए सुपारी को किसी पीले कपड़े में बांधकर लॉकर में रख ले।

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धनतेरस
MahaLakshmi Yantra

महालक्ष्मी व्रत रखने वालो को पूजन में इन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए :

  1. पूजन में पानी से भरे कलश को पान के पत्तों से सजाएँ इससे महालक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके साथ ही कलश के ऊपर नारियल रखना भी शुभ माना जाता है|
  2. कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें| कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी को सोने के गहनों से सजाने से भी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है
  3. श्रीयंत्र के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी रहती है और कहा जाता है कि महालक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा करने से आर्थिक सुधार आ सकता है|
  4. महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के 8 स्वरुपों की पूजा के साथ महालक्ष्मी मंत्र का जप करना अत्यंत आवश्यक है| ऐसा माना जाता है कि इन मंत्रो का जप करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है|

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माता की प्रिय आरती

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरी विष्णु विधाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।

Om jay lakshmee Maata,
Maiya jay lakshmee Maata.
Tumako nishidin sevat, Haree Vishnu Vidhaata..
Om jay lakshmeeMaata

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

Uma, Rama, Brahmaanee, Tum hee jag Maata..
Soorya-Chandrama dhyaavat, Naarad rishi gaata..
Om jay Lakshmi Maata


दुर्गा रूप निरंजनी, सुख संपति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि सिद्धि धन पाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

Durga Roop Niranjanee, Sukh Sampati Daata.
Jo koi tumako dhyaavat, Riddhi Siddhi Dhan paata..
Om Jay Lakshmi Maata

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तुम पाताल-निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

Tum Paataal-Nivaasinee, Tum hee Shubhdaata.
Karm-prabhaav-prakaashinee, Bhavanidhi kee traata..
Om Jay Lakshmi Maata


जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

Jis Ghar mein Tum Rahatee, Sab Sadgun Aata.
Sab Sambhav ho jaata, Mann Nahi Ghabaraata..
Om Jay Lakshmi Maata

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तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

Tum Bin yagya na hote, Vastra na koi paata.
Khaan-Paan ka Vaibhav, Sab tumse Aata..
Om Jay Lakshmi Maata

शुभ-गुण, मंदिर-सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न-चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे,

Shubh-Gun, Mandir-Sundar, Ksheerodadhi Jaata.
Ratn-Chaturdash Tum bin, Koi Nahi Paata..
Om Jay Lakshmi Maata


महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।

Maha Lakshmi jee kee Aaratee, Jo koi Nar Gaata.
Ur Anand Samaata, Paap utar jaata..
Om Jay Lakshmi Maata

ऊं आद्यलक्ष्म्यै नम:
ऊं विद्यालक्ष्म्यै नम:
ऊं सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:
ऊं अमृतलक्ष्म्यै नम:
ऊं कामलक्ष्म्यै नम:
ऊं सत्यलक्ष्म्यै नम:
ऊं भोगलक्ष्म्यै नम:
ऊं योगलक्ष्म्यै नम:

Om adyalakshmyai namah
Om Vidyalakshmyai namah
Om saubhagyalakshmyai namah
Om Amritalakshmyai namah
Om kamalakshmyai namah
Om satyalakshmyai namah
Om bhogalakshmyai namah
Om Yogalakshmyai namah

आज धनतेरस पर यम का दीपक अवश्य जलाएं| क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन यम की पूजा करने से यम देवता सबकी अकाल मृत्यु रक्षा करते है| आज धनतेरस पर यम के दीपक का मुहूर्त शाम को 01 घंटा 20 मिनट का है। आज धनतेरस की शाम को 05:34 से शाम 06:54 तक आपको यमराज के लिए दीपदान कर देना चाहिए।

Fire Lamp for God of death on the auspicious day of Dhanteras
Yam ka Dipak

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