जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी- Best and Oldest Arati even in 2021

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मां दुर्गा की व्याख्या

जय अम्बे गौरी – यह मां दुर्गा की एक बेहतरीन आरती है | हर पूजा का समापन माता दुर्गा की इसी आरती से होता है | अतः यह माता के भक्तों की प्रिय आरती है जिसके बिना माँ दुर्गा की पूजा का समापन होना मुश्किल है | हालाँकि श्री लखबीर सिंह लक्खा जी ने इस भजन को अपने सुरों में पिरोकर माता के इस स्वरुप का पूरा चित्रण किया है |नवरात्र में यह भजन, पुरे संसार में हर जगह, जहाँ भी माता के भक्त हैं, वहां पूरी श्रद्धा के साथ गया जाता है, यहाँ तक की बड़े-बड़े ऑफिसों या घरों में जहाँ माता का नित्य पाठ होता है, वहां हर दिन इसी भजन द्वारा माता की आरती की जाती है|

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माता दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है| इनकी तुलना परम ब्रह्म से की गई है| इन्हें जगदंबा भी कहते हैं| इन्हें गुणवती योग माया, बुद्धत्व की जननी बताया गया है| माँ दुर्गा का निरूपण रूप सिंह पर सवार एक देवी के रूप में की जाती है| उन्होंने महिषासुर नामक असुर का वध करने के लिए दुर्गा का स्वरूप धारण किया | माँ दुर्गा के कई स्वरूप हैं – दुर्गा, काली व पार्वती। मुख्य रूप “गौरी” हैं और वे भगवान शिव की पत्नी है|

जय अम्बे गौरी
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माँ दुर्गा की आरती

भगवत पुराण के अनुसार माँ दुर्गा का अवतार महिषासुर जैसे राक्षसों का वध करने के लिए हुआ था । ऋगवेद के अनुसार माँ दुर्गा ही आदि-शक्ति है, उन्‍ही से सारे विश्‍व का संचालन होता है, इसीलिए नवरात्रि के दौरान नव-दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के हर एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है। कलकत्ता में माँ काली के रूप में उनकी पूजा की जाती है और उनके अनेकों प्रसिद्द मंदिर हैं | भारतवर्ष में कहीं पर महिषासुरमर्दिनि शक्तिपीठ है तो कहीं पर कामाख्या देवी और सहारनपुर में सिद्धपीठ शाकंभरी देवी के रूप में ये ही पूजी जाती हैं।

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वैसे हिंदू धर्म में मां दुर्गा शिव जी की पत्नी पार्वती कहलाती है| जिन ज्योतिर्लिंग में देवी दुर्गा की स्थापना रहती है उन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है| देवी दुर्गा की आरती में मांता दुर्गा के रूप का बखान है| यह एक आरती है जो की सुनने में काफी निराला है, इस आरति के नित्य पाठ से आपको बड़ा आनंद महसूस होगा और आप स्वयं अपने जीवन में एक अलग आनंद की अनुभूति करेंगें|

माता दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी-ॐ जय अम्बे गौरी॥

माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको-ॐ जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै-ॐ जय अम्बे गौरी॥

के हरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी-ॐ जय अम्बे गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति-ॐ जय अम्बे गौरी॥

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती-ॐ जय अम्बे गौरी॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे-ॐ जय अम्बे गौरी॥

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी-ॐ जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु-ॐ जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता-ॐ जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।

मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी-ॐ जय अम्बे गौरी॥

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति-ॐ जय अम्बे गौरी॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै-ॐ जय अम्बे गौरी॥

Jai Ambe Gauri

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Singer : Sri Lakhbir Singh Lakkha

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