Jagat ke Rang-prayer

जगत के रंग क्या देखूं – Jaya Kishori

जगत के रंग क्या देखूं 

जगत के रंग क्या देखूं
जगत के रंग क्या देखूं

जगत के रंग क्या देखूं
तेरा दीदार काफी है,
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे,
तेरा दरबार काफी है |

नहीं चाहिए ये दुनियां के,
निराले रंग ढंग मुझको,
निराले रंग ढंग मुझको,
चली जाऊँ मैं वृंदावन,
तेरा श्रृंगार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं….|

जगत के साज बाजों से,
हुए हैं कान अब बहरे,
हुए हैं कान अब बहरे,
कहाँ जाके सुनूँ बंशी,
मधुर वो तान काफी है |
जगत के रंग क्या देखूं….|

जगत के रिश्तेदारों ने,
बिछाया जाल माया का
बिछाया जाल माया का ।
तेरे भक्तों से हो प्रीति,
श्याम परिवार काफी है ॥
जगत के रंग क्या देखूं….|

जगत की झूटी रौनक से,
हैं आँखें भर गयी मेरी
हैं आँखें भर गयी मेरी,
चले आओ मेरे मोहन,
दरश की प्यास काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं….|

जगत के रंग क्या देखूं,
तेरा दीदार काफी है ।
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे,
तेरा दरबार काफी है ॥

जगत के रंग क्या देखूं 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *