चतुर्युग व्यवस्था

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चतुर्युग व्यवस्था
चतुर्युग व्यवस्था

पढ़े और जाने चतुर्युग व्यवस्था (discover Universe)

OmPng

|| श्री गणेशाय नमः ||
|| अथ चतुर्युग व्यवस्था ||

गुरुब्रह्मा, गुरुविष्णु:, गुरुदेवो महेश्वर: |
गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम: ||

स जयति सिंदूरवदनो देवो यत्पादपंकजस्मरणम् |
वासरमणिरिक्तमसां राशिन्नाशयति विघ्नानाम् ||
कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्षःस्थले कौस्तुभम् |
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेेेेणुः करें कंकणम् ||
सर्वांड्गे हरिचदनं सुललितं विजयते गोपालचूड़ामणिः ||
गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूड़ामणिः ||

नूतन संवत् जब लगे, घर लो स्वच्छ कराय |
घर को सजा संवारकर, दो ध्वजा फहराय ||
पंडित कोई विद्वान को सादर लेेव बुलाय |
उनका पूजन अर्चन सम्मान कर आसन देव लगाय ||
कलश स्थापन करके पूजा लेकर कराय |
फिर पंचांग संवत् कथा सविधि सुनो मनलाय ||

नए वर्ष का फल गंगा स्नान व सूर्य ग्रहण स्नान के समान होता है इस दिन नीम की छोटी कोमल-पत्ती, जीरा, काली मिर्च, हींग, नमक पीसकर खाने से शरीर निरोग और स्वस्थ रहता है |

चतुर्युग व्यवस्था

चतुर्युग व्यवस्था
Brahmma (ब्रह्मा)

क्या है चतुर्युग व्यवस्था

|| चतुर्भुज व्यवस्था ||
श्रीमद्भागवत पुराण में पुरुषोत्तम भगवान विष्णु से उत्पन्न ब्रह्मा की आयु 100 वर्ष मानी गई है | पितामह ब्रह्मा की आयु का आधा 50 वर्ष पूर्वपरार्ध (प्रथम) तथा उत्तरार्ध के 50 वर्ष को द्वितीय परार्ध कहते हैं | वर्तमान में पूर्वार्ध 50 वर्ष आयु व्यतीत हो चुकी है | सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलयुग को मिलाकर एक महायुग कहलाता है | 1000 महायुग व्यतीत होने पर ब्रह्मा का 1 दिन होता है और इतनी ही वर्षो की रात होती है |

Existence of the Universe, Timings and history

महर्षि व्यास के अनुसार ब्रह्मा के 1 दिन में 14 मनु शासन करते हैं | मनु को मन्वंतर भी कहा जाता है | 14 मनु के नाम इस प्रकार है: १) स्वायंभू मनु २) स्वारोचिष मनु ३) उत्तम ४) तामस ५) रेवत ६) चाछषु ७) वैवस्वत 8) सावर्णि‌ 9) दक्ष सावर्णि‌ 10) ब्रह्म सावर्णि‌ 11) धर्म सावर्णि‌ 12) रुद्र सावर्णि‌ 13) देव सावर्णि‌ 14) इंद्र सावर्णि‌ |

क्या है चतुर्युग व्यवस्था

इस प्रकार ब्रह्मा के 51 वर्ष प्रथम दिन के 6 मनुवन्तर व्यतीत हो गए हैं | सातवें मनु ( वैवस्वत ) काल का 28वाँ महायुुग चल रहा है | प्रत्येक मनु का शासन 71 महायुगों का होता है | एक महायुग में 43 लाख 23 हज़ार वर्ष होते हैं | ये सौर वर्ष कहळाते हैं | 14 मनुुुओं के राज्य को 1 कल्प कहते हैं, अर्थात ब्रह्मा का 1 दिन 1 कल्प कहलाता है | प्रत्येक कल्प के अंत में एक संधि होती है |मनु के संधि का मान, सतयुग के वर्षमान के बराबर होता है | पूर्वपरार्ध के आरंभ में ब्राह्म नामक महान कळ्प हुआ, उसी में ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई थी | आदि में ब्राह्म कळ्प, अंतिम पाद कल्प कहलाया | ( संवत्सारावली )

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युगोत्पत्ति
कृत युग ( सतयुग ) – कार्तिक शुक्ल नवमी बुधवार, श्रवण नक्षत्र, धृति योग में मध्यान्हकाल में हुआ | इसकी संधि सहित आयु 17 लाख 28 हजार मानव वर्षो की होती है | इसमें मत्स्य, कच्छप, वराह, नृसिंह 4 अमानुष अवतार हुए |

matsy vishnu avatar
Matsya avtar (मत्स्यावतार)

1) मत्स्यावतार – प्रभव संवत्सर में चैत्र कृष्ण पंचमी, बुधवार, मूल नक्षत्र तथा सिद्धि योग में सायंकाल हुआ था | यह अवतार शंखासूर दैत्य को वध करने व वेदों के उद्धार हेतु हुआ |

चतुर्युग व्यवस्था
kachchap avtar (कच्छपावतार)

2) कच्छपावतार– विभव संवत्सर में जयेष्ठ कृष्ण दशमी रविवार रोहिणी नक्षत्र धृति योग में सायंकाल को हुआ था | यह अवतार पृथ्वी के भार को हरण करने हेतु तथा शेष के भार को कम करने और शेष को सुख देने के लिए हुआ |

चतुर्युग व्यवस्था
Baraah Avtar (वराहअवतार)

3) वराहअवतार– शुक्ल संवत्सर में चैत्र कृष्ण त्रयोदशी रविवार, धनिष्ठा नक्षत्र, ब्रम्हयोग मे अपराह्न काल में हुआ था | यह अवतार सागर में विलीन पृथ्वी के उद्धार हेतु तथा हिरण्याक्ष दैत्य के वध हेतु हुआ |

Narsingh
Narsingha Awtar

4) नृसिंहावतार– अंगिरा संवत्सर में वैशाख शुक्ल 14 रविवार, विशाखा नक्षत्र, वरीयान योग में सायंकाल के समय हिरण्यकश्यपु वध तथा प्रह्लाद के रक्षा हेतु हुआ |

Discovery of Universe

|| कृतयुग ( सतयुग ) व्यवस्था ||
सतयुग में पाप 0, पुण्य 20, मनुष्य की आयु 1लाख वर्ष, शरीर की ऊंचाई 21 हाथ, स्वर्णमय पात्र, रत्नमय द्रव्य का व्यवहार, मनुष्यो में ब्रह्मांडगत प्राण, दिव्यान्न भोजन, पुष्कर तीर्थ, सतयुग में धर्म अपने चारों पैर से धरती पर स्थित था |इक्ष्वाकु 2) मान्धाता 3) मुचुकुन्द 4) भैरव 5) नंदक 6) अन्धक 7) हिरण्ययक्ष 8) हिरण्यकश्यपु 9) प्रह्लाद 10) विरोचन 11) बलि 12) कपिल 13) कपिल भद्र 14) बाणासुर राजा हुए |

तीनों लोकों में इनकी गति रही | ये सभी ब्रह्म उपासक थे | प्रजा पालन में तत्पर, दिव्य अन्न भक्षण करने वाले थे | दिव्य वस्त्र धारण करते थे | ये यदि एक भी पाप करते थे, तो उनका देश भी नष्ट हो जाता था | ब्राह्मण वेद पाठी थे | सत्यव्रत ईश्वर आराधना में संलग्न रहते थे | आशीर्वाद, श्राप, अनुग्रह देने में समर्थ थे | पर द्रव्य, पर स्त्री विरत थे | गाय इच्छा अनुसार दूध देने वाली होती थी | नदियों में भरपूर जल, फल-फूलों से वृक्ष समय पर सदा भरपूर रहते थे |सूर्य ग्रहण 32 हज़ार, चंद्रग्रहण 5 हज़ार हुवे | सभी मनुष्य सत्यवादी एवं धर्मात्मा थे |

Avatar : Chaturyug Vyavastha

|| त्रेतायुग व्यवस्था ||
त्रेतायुग – वैशाख शुक्ल 3 गुरुवार, रोहिणी नक्षत्र तथा धृति योग में प्रारंभ हुआ | इसमें वामन, परशुराम और राम, तीन अवतार हुए | त्रेता युग की आयु 12 लाख 9 6 हज़ार मानव वर्ष की संधि सहित थी | त्रेता युग में धर्म तीन पद से पृथ्वी पर प्रतिष्ठित था |

चतुर्युग व्यवस्था
Baamna avtar (बामणावतार)

1) बामणावतार– सर्वजीत संवत्सर में भाद्रपद शुक्ल 12 शुक्रवार को श्रवण नक्षत्र तथा शोभन योग में हुआ था | इस युग में यज्ञ करते हुए बलि से भगवान वामन ने तीन पग पृथ्वी दान लेकर उसे पाताल भेज दिया |

चतुर्युग व्यवस्था
Parshuram Avtar (परशुरामावतार)

2) परशुरामावतार – सर्वजीत संवत्सर, वैशाख शुक्ल 3 मंगलवार, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, वरीयान योग में हुआ | यह अवतार अभिमानी क्षत्रियों के विनाश व भक्तों के रक्षार्थ हुआ |

चतुर्युग व्यवस्था
Ram Avtar (रामावतार)

3) रामावतार– तारण संवत्सर, चैत्र शुक्ल नवमी गुरुवार को पुनर्वसु नक्षत्र, सुकर्मा योग, कर्क लग्न में मध्यान्ह काल में दशरथ पुत्र के रूप में हुआ था |यह अवतार रावण वध के लिए हुआ |

युग व्यवस्था– त्रेता में पाप-5, पुण्य-15 ( विश्वा ) मनुष्यों की आयु 10 हज़ार वर्ष, शरीर की ऊंचाई 14 हाथ, चाँदी के पात्र, स्वर्ण द्रव्य, अस्थिगत प्राण, नेमिसारन्य तीर्थ, स्त्रियाँ पतिव्रत परायण थी | सूर्य ग्रहण 3,200, चंद्र ग्रहण 500 हुए | सभी लोग धर्म-कर्म में परायण थे |

त्रेता में सूर्यवंशी राजा– 1) मनु 2) धूम्राक्ष 3) विकुक्षि 4) हरिश्चन्द्र 5) रोहिताशव 6) सगर 7) मुन्ज्ज 8) अश्वभुज 9) भागीरथ 10) दिलीप 11) रघु 12) अज 13) दशरथ 14) रामचंद्र 16) कुश 17) अग्निवर्ण 18) मेघ्द्युती राजा हुए |

इनका इंद्रलोक तक गमन और ब्रह्मा की उपासना में तत्पर रहते थे | प्रजापालन में निरत थे | दिव्यान्न भक्षण, दिव्य वस्त्र धारण करते थे | इनमें कोई पाप करता तो गांव का गांव नष्ट हो जाता था | ब्राह्मण वेदों का पाठ करते थे | परस्त्री, परद्रव्य बिमुख थे | श्राप-अनुग्रह सामर्थ होते थे | गाय तीन बार दूही जाती थी | पृथ्वी सभी प्रकार से परिपूर्ण थी | एक बार बोने से फसल 7 बार काटी जाती थी |

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|| द्वापर युग व्यवस्था ||
द्वापर युग- माघ कृष्ण 30 अमावस्या शुक्रवार, धनिष्ठा नक्षत्र, वरयान योग में रात्रि में प्रारंभ हुआ था | द्वापर युग प्रमाण 8 लाख 64 हज़ार मानव वर्ष है | इसमें कृष्ण और बुद्ध 2 अवतार हुए |

चतुर्युग व्यवस्था
Krishna Avtar (कृष्ण अवतार)

1. कृष्ण अवतार– भाद्र कृष्ण अष्टमी दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र, निशीथ काल (मध्य रात्रि) में हुआ | यह अवतार कंंस आदि दुष्ट अत्याचारी राजाओं के मारने व गोप बंधुओं की रक्षा के लिए हुआ |

चतुर्युग व्यवस्था
Buddha Awtar (बुद्धावतार)

2. बुद्धावतार– अश्विन शुक्ल 10 गुरुवार को हुआ था | यह अवतार दैत्यों को मोहित करने तथा प्रजा की शांति के लिए हुआ था |

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द्वापर युग व्यवस्था: द्वापर में पाप-10, पुण्य-10 ( विश्वा ) मनुष्यों की आयु 1 हज़ार वर्ष, ऊंचाई 7 हाथ थी | ताम्रपात्र, रोप्यमय द्रव्य, कुरुक्षेत्र प्रमुख तीर्थ था| स्त्रियां शंखिनी थी | सूर्य ग्रहण-320, चंद्र ग्रहण-50 हुए थे | सभी वर्ण अपने धर्म- कर्म में लगे रहते थे | द्वापर युग में धर्म केवल दो चरणों से पृथ्वी पर प्रतिष्ठित था | इस युग में चंद्रवंशी राजा – सोम, बुध, पुरुरवा, नल, अनल, नहुष, शांतनु, विचित्र वीर्य, चित्र वीर्य, पान्डु, युधीष्ठिर, अभिमन्यु, परीक्षित, जन्मेजय हुए | इनका गमन सुमेरु पर्वत तक था | दिब्यान्न भोजन, दिव्य वस्त्र धारण करते थे | ईश्वर आराधना में तत्पर रहते थे | गायेें दो बार दुही जाती थी | फसल बोने के बाद पांच बार काटी जाती थी |

चतुर्युग व्यवस्था: Kalyug

कलयुग का आगमन भाद्र कृष्ण त्रयोदशी रविवार, श्लेषा नक्षत्र था व्यतिपात योग में अर्धरात्रि में हुआ| कलयुग का कुल आयु प्रमाण 4 लाख 32 मानव हज़ार वर्ष है| इसमें एक अवतार संभल देश में (विष्णु नामक) गौड़ ब्राह्मण के घर कल्की के नाम से होगा | कलयुग में पाप 15, पुण्य 5, ( विश्वा) मनुष्यो की आयु 100से 60 वर्ष, शरीर की ऊंचाई 3 हाथ, मिट्टी तथा लोह के पात्र, ताम्रमय व लोह द्रव्य, गंगा तीर्थ तथा अन्नमय प्राण होगा | कलयुग में धर्म के अन्य अंगों की पूर्णतया उपेक्षा होगी |

लोग झूठ बोलने वाले असत्यवादी होंगे | सभी वर्ण अपने अपने कर्म से रहित होंगे | गाय अल्प दूध देने वाली होंगी | कलयुग में पृथ्वी बीज रहित, औषधियां रस रहित होगीं | नीच लोग सन्यासी का वेश धारण कर सन्यास आश्रम को बदनाम करेंगे | सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण अधिक होंगे | राजा लोग अपने धर्म को त्याग देंगे| ब्राह्मण पथभ्रष्ट होंगे | स्त्रियां पति विरोधी होंगी | पुत्र माता-पिता विरोधी होंगे | कलयुग में सर्वत्र कष्ट ही कष्ट रहेगा | कलयुग में धर्म मात्र एक पद पर स्थित रह जाएगा | पृथ्वी गंगा विहीन हो जाएगी | लोग भूत पिशाच आदि की पूजा करेंगे |

चतुर्युग व्यवस्था: Kalyug

भागीरथी गंगा का कथन है- जब तक मैं तुम्हारे साथ धरती लोक में बैठी रहूंगी| जब तक गुरु नक्षत्र ग्रह मंडल में स्थित होंगे, बड़वा, नल समुद्र में कार्यरत रहेगा, मै धरती नहीं छोडूंगी | कलयुग के 10 हज़ार वर्ष बाकी रहने तक प्रतिज्ञाबद्द हूँ | कलयुग के आरंभ में 6 शाका (संवत्सरकर्ता) चलाने वाले राजा होंगे- युधिष्ठिर, विक्रमादित्य, शालिवाहन, विजयाभिनंदन, नागार्जुन, कल्कि राजा आरंभ मे युधिष्ठिर शाका 3044 तक चंद्रवंशी राजा 1 अर्जुन, 2अभिमन्यु, 3परीक्षित 4 जनमेजय 5 वत्सराज 6) युवनाश्व आदि राजा हुए| इसके बाद सूर्यवंशी राजा क्रमशः अश्वपति, गजपति, नरपति, महीपति, महिपाल, महेंद्रपाल, गंधर्वसेन आदि राजा हुए |

चतुर्युग व्यवस्था

युधिष्ठिर शाका 3044 वर्ष के बाद उज्जैन में विक्रमादित्य राजा हुए | उनका शाका 135 वर्ष था | इसके अंतर्गत विक्रमादित्य, भात्रिहारी, सेनी, मुंज, भोज तथा रामदेव राजा हुए | नर्मदा के तट पर 18 हज़ार वर्ष तक शालिवाहन शक चलेगा | इसमें शालीवाहन शालीकुमार क्षत्रक इंद्रकिरीट, ब्रह्मादिवाकर मलिमदत्त, गौडम्बक, जयदेव, श्री मद्देव, नरेंद्रशाह 10 राजा होंगे | इसके बाद यवन वंशी राजाओं का राज्य होगा जिसमें तिमिरलिंग शाह, बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, औरंगजेब, बहादुर शाह, मोहम्मद शाह, अहमद शाह, आलमगीर शाह, शाह आलम आदि यवन बादशाह होंगे |

यवनवंशी राजाओं के बाद गौरांगवंशी महारानी विक्टोरिया, सप्तम एडवर्ड, पंचम जॉर्ज (अंग्रेजी हुकूमत) ठीका के राजा राज्य करेंगे | लूटपाट, चोरी, बेईमानी, धांधली दगाबाजी, दल-बदलू सरकारों का राज्य होगा | नौकरशाही गरीब जनता को चूसेगी | उत्पीड़न करेगी | हर जगह फर्जी आंकड़ा, फर्जी जांच, फर्जी न्याय की अधिकता होगी | जनता के ऊपर अनाचार अत्याचार का बोलबाला होगा |जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत लागू रहेगी | नेताओं की होड़बाजी होगी | हरिजनों का राज्य होगा चलेगा | कलि के 821 वर्ष शेष रहने पर कल्कि का अवतार होगा जो बिगड़ी शासन व्यवस्था को ठीक करेंगे |

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चतुर्युग व्यवस्था

चतुर्युग व्यवस्था : इस ब्रम्हांड में चार युगों की व्यवस्था के बारे में जाने

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