गणेश आरती

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गणेश जी की आरती
Lord Ganesha’s Aarti

गणेश आरती

|| श्री गणेश स्तुति ||

ओम गजाननंं भूतगणाधि सेवितम्, कपित्थजंबू फल चारु भक्षणम्|

उमासुतम शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम |

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ |

निर्विघ्नम कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ||

गाइए गणपति जगवंदन | शंकर सुवन भवानी नंदन ||१ ||

सिद्धि-सदन, गज-बदन, विनायक | कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक ||२ ||

मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता | विद्या वारिधि बुद्धि विधाता ||३ ||

मांगत तुलसीदास कर जोरे | बसहिं रामसिय मानस मोरे ||४ ||

|| ओम श्री परमात्मने नमः ||

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च, सखा त्वमेव |

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देवदेव ||

Ganesh Aarti

Listen महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रं

देवाधिदेव परमेश्वर ! आप ही माता और आप ही पिता हैं, आप ही बंधु और आप ही सखा हैं, आप ही विद्या और आप ही धन है, अधिक क्या कहूं, मेरे सब कुछ आप ही हैं |

|| त्वमेव माता च पिता त्वमेव ||

तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो,

तुम्हीं हो बंधु सखा तुम्हीं हो,

तुम्हीं हो साथी तुम्ही सहारे,

ना कोई अपना बिन तुम्हारे |

तुम ही हो नैया, तुम ही खेवईया,

तुम्हीं हो बंधु सखा तुम्हीं हो ||

जो खिल सके ना वो फूल हम हैं,

तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं |

दया की दृष्टि सदा ही रखना,

तुम ही हो बंधु सखा तुम्ही हो ||