कालसर्प योग

कालसर्प योग – 9 remedies, know the best way to recover

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कालसर्प दोष के परिणाम

कालसर्प योग से जो जातक प्रभावित होते हैं उन्हें स्वप्न में सर्प दिखाई देते हैं| जातक अपने कार्यों में कठिन परिश्रम करने के बावजूद, अपने आशाओं जैसी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता, हमेशा मानसिक चिंताओं से तनावग्रस्त रहता है, अकारण लोगों से शत्रुता बढती है, गुप्त शत्रु सक्रिय रहते है और वह सही निर्णय नहीं ले पाता, परिवारिक जीवन कलहपूर्ण हो जाता है, विवाह में विलंब और वैवाहिक जीवन में तनाव के साथ अनिष्टकारी स्थितियां हो जाती है|

कालसर्प योग
Kalsarp Yog

कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव

कालसर्प योग (Kalsarp Yoga) : सर्वाधिक प्रभावकारी होता है, जातक को इस समय शारीरिक और मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, व्यवसाय आदि से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है| कालसर्प योग से डरने या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है| कालसर्प योग का निवारण किसी योग्य ज्योतिषी या देवाग्य से कराकर उसका निदान कर लेना चाहिए|

कालसर्प योग  प्रमुख रूप से भाव के आधार से 12 प्रकार के होते हैं:

१) अनंत काल सर्प योग २) कुलिक योग ३) शंख योग ४) वासुकी योग ५) पद्म योग ६) महापद्म योग ७) तक्षक योग ८) कंकोर्टक कालसर्प योग ९) शंखनाद (शंखचूड) कालसर्प योग १०) घातक काल सर्प योग  ११) विषधर कालसर्प योग  १२) शेषनाग कालसर्प योग

राहु और केतु हमेशा वक्रगति से चलते हैं| राहु से केतु की ओर बननेवाला योग ही कालसर्प योग बनता है| केतु से राहू की ओर बननेवाला योग अनेक ज्योतिष द्वारा कालसर्प योग नहीं माना जाता| कालसर्प योग किसी न किसी पूर्व जन्म कृत अथवा पितृ दोष के कारण बनता है|

ग्रहों की शान्ति के लिए कालभैरवाष्टकम् स्तोत्रं के बारे में जाने

१) अनंत कालसर्प योग (Anant Kalsarp Yoga)–  लग्न से सप्तम भाव तक बनने वाला योग है| जिससे जातक को मानसिक अशांति, कपट बुद्धि,  बैवाहिक जीवन का दुखमय होना तथा जातक को आगे बढ़ने में काफी संघर्ष करना पड़ता है|

२) कुलिक कालसर्प योग (Kulik Kalsarp Yoga)–  द्वितीय स्थान से अष्टम स्थान तक पढ़ने वाला योग जिससे जातक का स्वास्थ्य प्रभावित होता है| आर्थिक क्षेत्र में अत्यंत संघर्ष करना पड़ता है| जातक के वाणी में  कर्कश्पन से कलहपन की स्थिति बन जाती है| पारिवारिक विरोध, अपयश का भागी, विवाह में विलंब तथा विच्छेदक भी बन जाता है|

३) शंखपाल कालसर्प योग (Shankhapal Kalasarp Yoga)यह योग चतुर्थ से दशम भाव में बनता है| जिससे जातक नौकरी, विद्याध्यन आदि में रुकावटें खड़ी होती है| व्यापार में घाटा आदि होना या सामना करना पड़ता है तथा कोई ना कोई समस्या विघ्न  में डाल देती है|

४)  वासुकी कालसर्प योग
(Vasuki Kalsarp Yoga) – यह योग तृतीय से नवम् भाव में बनता है| परिवारिक विरोध, भाई बहनों से मनमुटाव, मित्रों से धोखा मिलता है| कानूनी रुकावटें, धर्म के प्रति नास्तिकता, नौकरी-धंधे में उलझने बनी रहती है| जातक के साथ कोई ना कोई बदनामी जुड़ी रहती है| मानसिक तनाव बना रहता है|

५) पद्म कालसर्प योग (Padma kalasarpa yoga) – पंचमी से एकादश भाव में राहु-केतु होने से यह योग बनता है| ऐसे जातक को विद्याध्यन में रुकावट आती है| संतान सुख में कमी या संतानों का दूर रहना या विच्छेद होना, पत्नी व मित्रों से विश्वास में कमी, जुआ, लॉटरी, सट्टा में सर्वस्व स्वाहा करना, विश्वासी व्यक्तियों से धोखा, संघर्षपूर्ण जीवन बिताना व जातक की शिक्षा अपूर्ण रहना आदि|

६) महापद्म कालसर्प योग (Mahapadma Kalasarpa Yoga)छः से बारहवें भाव में राहु और केतु होने से यह योग बनता है| आत्म बल में गिरावट, पत्नी बिछोह, प्रयत्न के बाद भी बीमारियां नहीं छूटती है, गुप्त शत्रु निरंतर षड्यंत्र करते रहते हैं, यात्राओं की अधिकता रहती है|

७) तक्षक कालसर्प योग (Takshak Kalsarp Yoga) – सप्तम से लगन तक राहु-केतु होने से यह योग बनता है| इसमें प्रभाव, वैवाहिक जीवन एवं संपत्ति के स्थायित्व, जीवनसाथी से बिछोह, प्रेम प्रसंग में असफलता, बनते कार्यों में रुकावट आना, बड़ा पद मिलते-मिलते रुक जाता है| असाध्य रोगों से जूझना पड़ता है| मानसिक परेशानी बनी रहती है|

८) कंकोर्टक कालसर्प योग (Concortak Kalsarp Yoga)अष्टम भाव से द्वितीय भाव तक राहु-केतु से होने से कम कंकोर्टक कालसर्प योग बनता है| जातक को अल्पायु, दुर्घटना का भय, स्वास्थ्य चिंता, अर्थ-हानि, व्यापार में नुकसान, अधिकारियों से मनमुटाव साझेदारी में धोखा, अकाल मृत्यु अदि संयोग का सामना करना पड़ता है|

९) शंखनाद (शंखचूड)कालसर्प योग (Shankhanad /Shankhchud Kalsarp Yoga) नवम् भाव से तृतीय भाव में राहु-केतु होने से शंखनाद (शंखचूर्ण) कालसर्प योग बनता है| भाग्योदय में परेशानी, मित्रों द्वारा कपट, आगे बढ़ने में रुकावटें, व्यापार में घाटा, नौकरी आदि में अवनति घरेलू आपसी संबंध में दरार, शासन से कार्य में अवरोध, जातक के सुख में कमी|

१०) घातक कालसर्प योग (Deadly era snake yoga)दशम से चतुर्थ भाव तक राहु-केतु होने से घातक कालसर्प योग बनता है| व्यापार में घाटा, साझेदारी में मनमुटाव व सरकारी अधिकारियों से अनबन, माता-पिता, दादा-दादी का वियोग, गृहस्थ जीवन में कष्ट, निरंतर बढ़ती चिंताये|

११) विषधर कालसर्प योग (Vishadhar Kalsarp Yoga)एकादश स्थान से पंचम स्थान में राहु-केतु होने से विषधर कालसर्प योग बनता है| इस योग में उच्च शिक्षा में बाधा, नेत्र पीड़ा, अनिद्रा रोग, किसी लंबी बीमारी का योग, काका व चचेरे भाइयों में झगड़ा, परिवार में विग्रह, धन के मामले में बदनामी, अपनी जन्म स्थान से दूर जाना आदि|

१२) शेषनाग कालसर्प योग (Sheshnag Kalsarp Yoga) द्वादश से षष्ठ भाव में राहु-केतु स्थित होने से यह योग बनता है| शत्रुओं की अधिकता, जातकों को कोर्ट-कचहरी में पराजय का सामना होता है| निराशा अधिक रहती है| दिल-दिमाग परेशान रहता है| मनचाहा कार्य में रुकावट होती है और कर्जा उतारने में बाधाएं खड़ी होती हैं, हर कार्य में विलंब होता है|

ज्योतिष शास्त्र में सर्प से राहु और केतु का सम्बन्ध जोड़ा गया है| राहु को सर्प का मुंह और केतु को पूँँछ माना जाता है|आकाश में भौतिक शरीर ना होने पर भी इन छाया ग्रहों को अन्य सात ग्रहों- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध,,गुरु, शुक्र और शनि के समान ही स्थान प्राप्त है| कुंडली में राहु और केतु सदैव आमने-सामने 180 डिग्री पर रहते हैं|

यदि सातों ग्रह राहु-केतु के एक तरफ सिमट जाएं और दूसरी और कोई ग्रह नहीं बचे तो ऐसी स्थिति में कालसर्प योग बनता है|

कालसर्प दोष के उपाय :

१) श्रावण मास में रुद्राभिषेक अवश्य करें|
(२) तीर्थराज प्रयाग में तर्पण और श्राद्ध कर्म संपन्न करें|
(३) कालसर्प शांति का उपाय रात्रि में किया जाए, राहु के सभी पूजन शिव मंदिर में रात्रि के समय या राहु काल में करें|
(४) शिवलिंग पर मिश्री एवं दूध अर्पित करें, शिव तांडव स्त्रोत का नियमित पाठ करें|

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(५) नियमित पंचाक्षर मंत्र का जप करें और नियमित मूली दान करें तथा बहते जल में कोयला प्रवाहित करें|
(६) मसूर की दाल सफाई कर्मचारी को कुछ पैसे सहित प्रात:काल दे|

(७) बहते जल में विधान सहित पूजन कर, दूध के साथ चांदी के नाग-नागिन के जोड़े प्रवाहित करें|
(८) प्रत्येक महीने की पंचमी तिथि को एक नारियल नदी के जल में प्रवाहित करें|
(९) प्रत्येक अमावस्या को काल तिल, नारियल एवं कोयला काले कपड़े में बांधकर जल में बहाएं|

नवग्रह स्तोत्रं का जप करने के लिए यहाँ क्लीक करें

निवारण हेतु दान

राहू की पीड़ा व दोष के निवारण हेतु दान बुधवार, शनिवार को करें – १) काला तिल २) नीला कपड़ा ३) कंबल ४) काले रंग का फूल ५) सरसों का तेल ६) अभ्रक ७) शीशा  ८) सूप ९) गोमेद १०) गेहूं, गुड़ और दक्षिणा| यह दान रात्रिकाल में करें| 

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